बीकानेर नगर निगम चुनाव के नतीजे आने से पहले ही बाड़ेबंदी और सियासी जोड़-तोड़ तेज

बीकानेर नगर निगम चुनाव के नतीजे आने से पहले ही बाड़ेबंदी और सियासी जोड़-तोड़ तेज
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बीकानेर, 12 सितम्बर । बीकानेर नगर निगम चुनाव के परिणाम आने से पूर्व ही महापौर (मेयर) की कुर्सी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच सियासी खींचतान और रणनीति तेज हो गई है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने क्रास वोटिंग और सेंधमारी की आशंका के बीच अपने-अपने 78-78 पार्षद प्रत्याशियों को शहर से दूर अलग-अलग स्थानों पर सहेज कर रखा है। इसके साथ ही, दोनों दलों की नजरें चुनावी मैदान में अपनी जीत की उम्मीद लगाए बैठे निर्दलीय एवं बागी प्रत्याशियों पर टिकी हैं, जिनसे लगातार संपर्क साधने का प्रयास किया जा रहा है।

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कांग्रेस का दावा: ‘बाड़ेबंदी नहीं, चल रहा है प्रशिक्षण शिविर’कांग्रेस ने अपने सभी 78 प्रत्याशियों को नोखा रोड स्थित एक निजी होटल में ठहराया है। पार्टी इस व्यवस्था को बाड़ेबंदी मानने से स्पष्ट इनकार कर रही है।

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रणनीति व प्रशिक्षण: मेयर पद के मजबूत दावेदार और प्रत्याशी अनिल कल्ला ने स्पष्ट किया कि पार्टी में कई नए चेहरों को मौका मिला है। इस शिविर में प्रत्याशियों को पार्टी की विचारधारा, नीतियों के साथ-साथ महापौर चुनाव की प्रक्रिया और मतदान की बारीकियों के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन: पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला लगातार होटल पहुंचकर प्रत्याशियों का मनोबल बढ़ा रहे हैं और चुनावी रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। उनके अलावा, कांग्रेस शहर अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल एवं पूर्व शहर अध्यक्ष यशपाल गहलोत भी स्थल पर मौजूद रहकर लगातार व्यवस्थाओं की कमान संभाले हुए हैं।
भाजपा की रणनीति: जोधपुर रोड स्थित रिसॉर्ट में 78 प्रत्याशी एकजुटदूसरी ओर, भाजपा ने भी अपने सभी 78 प्रत्याशियों को एकजुट रखते हुए जोधपुर रोड स्थित एक रिसॉर्ट में ठहराया है।

नेतृत्व और अनुशासन: बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास भाजपा प्रत्याशियों का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि बीकानेर पूर्व क्षेत्र के प्रत्याशियों की कमान शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ संभाल रहे हैं।

संगठनात्मक फैसला: भाजपा खेमे का कहना है कि महापौर पद के उम्मीदवार का अंतिम फैसला संगठन के शीर्ष स्तर पर किया जाएगा। पार्टी की ओर से जो भी नाम तय होगा, सभी प्रत्याशियों को अनुशासित रहते हुए पार्टी लाइन पर ही मतदान करना होगा।
14 सितंबर को मतगणना, महापौर के लिए एक-एक वोट महत्वपूर्ण

नगर निगम के आगामी 14 सितंबर को आने वाले नतीजों के बाद बनने वाले बोर्ड में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के लिए दोनों ही दलों के लिए एक-एक पार्षद का समर्थन निर्णायक साबित होगा। इसी वजह से चुनाव परिणाम से पहले ही दोनों प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने और प्रत्याशियों को सुरक्षित व एकजुट रखने की कवायद में जुटे हुए हैं।

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