बैकुंठपुर IC मार्ट मामले में बड़ा फैसला, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दी जमानत
बैकुंठपुर किशोरी आत्महत्या प्रकरण: विनोद बैद को नियमित, जगत और दीपक बैद को अग्रिम जमानत

- बैकुंठपुर किशोरी आत्महत्या प्रकरण- विनोद बैद को नियमित, जगत और दीपक बैद को अग्रिम जमानत
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तीनों अपीलें स्वीकार कीं; 50-50 हजार रुपये के बंधपत्र और जमानतदार की शर्त
बिलासपुर, 14 अक्टूबर। (थार एक्सप्रेस।)छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बैकुंठपुर के आईसी मार्ट से जुड़े नाबालिग किशोरी की आत्महत्या के मामले में आरोपी विनोद कुमार बैद को नियमित जमानत तथा जगत कुमार बैद और दीपक बैद को अग्रिम जमानत प्रदान की है। न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने बुधवार को तीनों की अपीलों पर संयुक्त आदेश पारित करते हुए विशेष न्यायालय के पूर्व आदेशों को निरस्त कर दिया। प्रत्येक आरोपी के लिए 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही राशि का एक जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त रखी गई है।


क्या है मामला
अभियोजन के अनुसार, 7 जुलाई 2026 को 17 वर्षीय किशोरी अपनी 15 वर्षीय बहन के साथ घरेलू सामान खरीदने आईसी मार्ट, बैकुंठपुर गई थी। आरोप है कि प्रतिष्ठान का संचालन करने वाले आरोपियों ने दोनों को रोका, चोरी का आरोप लगाया और चोरी स्वीकार करने वाला नोट लिखवाया। आरोपियों पर स्कूटी की चाबियां अपने पास रखने तथा उन्हें लौटाने के लिए 50 हजार रुपये मांगने का भी आरोप है। अभियोजन का कहना है कि कथित अपमान, धमकियों और मानसिक दबाव के बाद किशोरी ने 9 जुलाई को आत्महत्या कर ली।


इस संबंध में बैकुंठपुर थाने में अपराध क्रमांक 214/2026 दर्ज किया गया था। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 107, 296, 308(2), 309(4) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) लगाई गई हैं। विनोद कुमार बैद 11 जुलाई से हिरासत में थे, जबकि जगत कुमार बैद और दीपक बैद को 8 सितंबर को अंतरिम अग्रिम जमानत मिली थी।
दुष्प्रेरण के लिए सीधे और निकट संबंध पर जोर
हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 45 का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्महत्या के दुष्प्रेरण के लिए सक्रिय उकसावा, जानबूझकर सहायता या ऐसा षड्यंत्र आवश्यक है, जिसका आत्महत्या से सीधा और निकट संबंध हो। अदालत ने इस मामले में माना कि चोरी के संबंध में पूछताछ करना, उसके बारे में लिखवाना और अभिभावकों को बुलाना अपने आप में दुष्प्रेरण की वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता।
केस डायरी के अवलोकन के आधार पर अदालत ने आदेश में उल्लेख किया कि चोरी की घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई थी और अगले दिन अभिभावकों को बुलाया गया था। अदालत ने आरोप-पत्र प्रस्तुत हो जाने, आरोपियों का आपराधिक पूर्ववृत्त नहीं होने, विनोद की हिरासत की अवधि तथा अन्य दो आरोपियों को पहले से मिली अंतरिम राहत को भी जमानत देने के आधारों में शामिल किया।
राज्य और मृतका के पिता ने किया था विरोध
राज्य की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि स्कूटी की चाबियां छीनने, 50 हजार रुपये मांगने और चोरी स्वीकार करवाकर अपमानित करने के कारण किशोरी ने आत्महत्या की। राज्य ने इन परिस्थितियों में प्रथमदृष्टया दुष्प्रेरण का मामला बनने की दलील दी। मृतका के पिता ने भी 29 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित होकर विनोद कुमार बैद की जमानत का विरोध किया था।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपियों की ओर से आत्महत्या के लिए किसी विशिष्ट सक्रिय उकसावे का उल्लेख नहीं है और धन मांगने व स्कूटी रोकने के आरोप सामान्य प्रकृति के हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी किशोरियों को पहले से नहीं जानते थे और उनकी जाति की जानकारी नहीं रखते थे।
विशेष न्यायाधीश के पूर्व आदेश निरस्त
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में संबंधित विशेष न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, जिला कोरिया, बैकुंठपुर द्वारा पारित 13 जुलाई, 16 जुलाई और 12 अगस्त 2026 के आदेशों को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही तीनों अपीलों को स्वीकार करते हुए विनोद कुमार बैद को नियमित जमानत तथा जगत कुमार बैद और दीपक बैद को अग्रिम जमानत देने का निर्देश दिया।
विनोद बैद को नियमित, जबकि जगत और दीपक बैद को अग्रिम जमानत
हाई कोर्ट ने तीनों आरोपियों की परिस्थितियों पर विचार करते हुए अलग-अलग प्रकार की जमानत मंजूर की। विनोद कुमार बैद 11 जुलाई 2026 से न्यायिक हिरासत में थे। न्यायालय ने आरोपपत्र दाखिल हो जाने, उनके जेल में रहने की अवधि तथा पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने सहित अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें नियमित जमानत देने का आदेश दिया। उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानतदार की जमानत पर संबंधित विचारण न्यायालय की संतुष्टि के अनुसार रिहा किए जाने का निर्देश दिया गया।
दूसरी ओर, जगत कुमार बैद और दीपक बैद को गिरफ्तारी की आशंका के मद्देनजर अग्रिम जमानत प्रदान की गई। इन दोनों को पहले 8 सितंबर 2026 को अंतरिम अग्रिम जमानत मिली थी। हाई कोर्ट ने उनके मामलों पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत की पुष्टि की और निर्धारित शर्तों के अधीन राहत प्रदान की।
गवाहों को प्रभावित नहीं करने और हर पेशी पर उपस्थित रहने की शर्त
अदालत ने तीनों आरोपियों को गवाहों को प्रलोभन या धमकी देने, तथ्यों के खुलासे से रोकने और निष्पक्ष व शीघ्र सुनवाई में बाधा डालने से प्रतिबंधित किया है। उन्हें विचारण न्यायालय की प्रत्येक निर्धारित तारीख पर उपस्थित रहना होगा। जगत और दीपक के लिए पहचान-पत्र व फोटो प्रस्तुत करने तथा भविष्य में समान प्रकृति के अपराध में शामिल नहीं होने की अतिरिक्त शर्तें भी लगाई गई हैं।
आदेश का कानूनी महत्व
इस मामले में हाई कोर्ट ने जमानत पर विचार करते समय कथित घटना और आत्महत्या के बीच कानूनी संबंध, दुष्प्रेरण के आवश्यक तत्व, आरोपपत्र दाखिल होने की स्थिति तथा आरोपियों के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड जैसे पहलुओं पर विचार किया। हालांकि, जमानत मिलना आरोपमुक्त होना नहीं है। मामले का अंतिम निर्णय विचारण के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायालय के अंतिम निष्कर्षों के आधार पर होगा।
अधिवक्ता
अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता संजय अग्रवाल, चंद्रेश श्रीवास्तव और शाश्वत गुप्ता ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता धर्मेश श्रीवास्तव उपस्थित हुए।”
खबर का आधार: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर का आदेश दिनांक 14 अक्टूबर 2026, आपराधिक अपील क्रमांक 1795/2026, 1800/2026 एवं 2173/2026, निर्णय संदर्भ 2026:CGHC:44429।

