गंगाशहर में रचा गया तप का नया इतिहास, विनोद आंचलिया ने सफलतापूर्वक पूर्ण की 61 दिनों की तपस्या
गंगाशहर में रचा गया तप का नया इतिहास, विनोद आंचलिया ने सफलतापूर्वक पूर्ण की 61 दिनों की तपस्या

- तेरापंथ सभा गंगाशहर द्वारा हुआ भव्य तपोअभिनंदन
बीकानेर (गंगाशहर), 14 अक्टूबर। गंगाशहर तेरापंथ भवन में जैन तेरापंथ परंपरा में तपाराधना का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ा। यहाँ 61 दिनों की कठिन और दीर्घ तपस्या करने वाले तपस्वी श्री विनोद आंचलिया का श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में गरिमामयी तपोअभिनंदन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रिया पारख द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुई।


साध्वीवृंद के पावन विचार और तप का महत्व
तपोअभिनंदन के अवसर पर अपने प्रवचन में साध्वी त्रिशला कुमारी जी ने तप के आध्यात्मिक स्वरूप को समझाते हुए कहा कि हमारे विज्ञ पुरुषों ने चार प्रकार की अग्नि बताई है—


- क्रोधाग्नि (जो स्वयं को भी जलाती है और दूसरों को भी)
- कटुवचन की अग्नि (जो दूसरों को जलाती है)
- ईर्ष्याग्नि (जो स्वयं को ही जलाती है)
- तपस्या रूपी अग्नि: इन सबसे परे यह वह पवित्र अग्नि है जो न स्वयं को जलाती है और न पर को, बल्कि यह हमारे कर्मरोग और कर्मशरीर को भस्म करती है।
साध्वीश्री ने भौतिकतावादी युग का स्मरण कराते हुए कहा कि जहाँ आज सुबह से शाम तक भोजन की तमाम वैरायटी डाइनिंग टेबल पर उपलब्ध रहती है, वहीं 61 दिनों तक रसेन्द्रिय का पूर्ण संयम रखते हुए केवल जल के आधार पर रहना अत्यंत दुष्कर कार्य है। जिनका अन्तरायकर्म का क्षयोपशम होता है, वही तपस्या के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। कायर या कमजोर इंसान के लिए एक दिन का उपवास भी कठिन होता है, लेकिन शूरवीर ही तप के समरांगण में विजय पाते हैं। तप एक ऐसा रॉकेट है जो हमें सीधे सिद्धि सदन तक पहुँचा सकता है।
शासन श्री प्रभाश्री ने कहां जिनशासन में तप का बड़ा महत्व है। तप से ही जिनशासन चिरंजीवी बनता है। अनेकोनेक तपस्वियों ने तप करके भिक्षुशासन की नीवों को गहरा बनाया है। तपस्वी भाई विनोद की तप अनुमोदना करते हुए साध्वी रश्मि प्रभा ने बहुत ही सुन्दर गीतिका का संगान किया।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति और सम्मान
साध्वी प्रमुखाश्री द्वारा प्रेषित पावन संदेश का वाचन तेरापंथ सभा के अध्यक्ष नवरतन बोथरा ने किया। सभा के मंत्री जतन संचेती ने तेरापंथ समाज की ओर से तपस्वी भाई का अभिनंदन किया। युवक परिषद के अध्यक्ष देवेन्द्र डागा ने अपनी मंगलभावनाएं प्रेषित कीं।
महिला मण्डल की 61 बहनों द्वारा 61 दिनों की तपस्या के उपलक्ष्य में प्रस्तुत किए गए गीत ने पूरे पंडाल में एक अद्भुत समां बांध दिया। आंचलिया परिवार के सदस्यों ने तपस्वी की खूब-खूब अनुमोदना की।
तेरापंथी सभा गंगाशहर की ओर से तपस्वी भाई को अभिनंदन पत्र और धार्मिक साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस आयोजन में तेरापंथ समाज के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक तपस्या की अनुमोदना कर अपने जीवन को धन्य बनाया।

