कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल हादसे पर गरमाई राजनीति

ममता बनर्जी
क्विक जेप्स विज्ञापन 13 oct 2026
  • भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बावजूद विवादित समिति को पुरस्कार मिलने पर उठे सवाल

कोलकाता, 19 अक्टूबर। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान हुई भीषण भगदड़ की घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है। सप्तमी के दिन हुई इस दुखद दुर्घटना में 19 लोगों की अकाल मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद आयोजकों की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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विवाद तब और गहरा गया जब राज्य के सूचना और संस्कृति विभाग एवं कोलकाता नगर निगम द्वारा उसी चोरबागान सर्वजनीन दुर्गोत्सव समिति को ‘बेस्ट ऑफ द बेस्ट’ यानी ‘सेरार सेरा-3’ श्रेणी के प्रतिष्ठित देवी दुर्गा सम्मान 2026 के अलावा ‘बेस्ट लाइटिंग’ और ‘बेस्ट पंडाल’ जैसे पुरस्कारों से नवाजा गया, जहां यह दुर्घटना घटी थी। ममता बनर्जी सहित आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर केवल भव्यता को बढ़ावा देने से ऐसी त्रासदियां होती हैं। इस बीच, प्रशासन ने भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान पंडालों में पर्याप्त रोशनी और आवागमन के लिए पर्याप्त प्रवेश व निकास द्वार सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

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प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
घटना के बाद सार्वजनिक मंचों पर यह सवाल प्रमुखता से उठाया जा रहा है कि जब किसी धार्मिक आयोजन या पूजा को ‘सर्वश्रेष्ठ’ का खिताब दिया जाता है, तो वहाँ आने वाले लाखों आम नागरिकों की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक होने पर आखिरकार किसकी सीधी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। आलोचकों और राजनीतिक दलों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करके केवल भव्यता और दिखावे को बढ़ावा देने का नतीजा ऐसी त्रासदियों के रूप में सामने आता है।

मुख्यमंत्री की अपील और आयोजकों के लिए निर्देश
इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन और सरकार की ओर से कड़े कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है। संबंधित नेतृत्व ने थीम-आधारित दुर्गा पूजा के सभी आयोजकों से यह सख्त अपील की है कि वे भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान पंडाल परिसरों में पर्याप्त रोशनी का समुचित इंतजाम रखें तथा भीड़ के सुचारू आवागमन के लिए पर्याप्त संख्या में प्रवेश और निकास द्वार सुनिश्चित करें। प्रशासन का मानना है कि कई बार आकर्षक थीम के नाम पर पंडालों के भीतर रोशनी बहुत कम रखी जाती है, जिससे भीड़ नियंत्रण में भारी कठिनाई होती है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भव्य और कलात्मक थीम वाले पंडालों के जरिए लोगों को आकर्षित करने की होड़ रहती है, लेकिन अब सुरक्षा और प्रशासनिक निर्देशों का सख्ती से पालन कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

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