बीकानेर की शिक्षकों की प्रमुख मांग—मतदाता कार्मिकों की ड्यूटी अन्य चरणों में लगाने का आग्रह
बीकानेर की शिक्षकों की प्रमुख मांग—मतदाता कार्मिकों की ड्यूटी अन्य चरणों में लगाने का आग्रह

- जिस चरण में स्वयं मतदाता, उस चरण में चुनाव ड्यूटी से मिले मुक्ति: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
बीकानेर, 22 अक्टूबर । पंचायत आम चुनाव 2026 के मद्देनजर शिक्षकों और अन्य राजकीय कार्मिकों के मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण मांग उठी है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान विद्यालय शिक्षा, बीकानेर ने जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर से आग्रह किया है कि चुनाव ड्यूटी में तैनात कार्मिकों को उनके स्वयं के मतदान वाले चरण में निर्वाचन दायित्वों से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।


महासंघ का स्पष्ट तर्क है कि यदि किसी शिक्षक या राजकीय कार्मिक का नाम उस पंचायत समिति क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है जहाँ किसी निर्धारित चरण में मतदान होना है, तो उस विशेष चरण में उसकी चुनाव ड्यूटी न लगाई जाए। इसके स्थान पर उसकी ड्यूटी किसी अन्य चरण में लगाई जानी चाहिए, जिससे वह अपने मताधिकार का बिना किसी बाधा के उपयोग कर सके।



लोकतंत्र में हर मतदाता कार्मिक को मिले मताधिकार का अवसर
प्रदेश सचिव रवि आचार्य ने इस विषय पर जोर देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाने में शिक्षक और अन्य कार्मिक रीढ़ की हड्डी होते हैं, और वे भी इस देश के जिम्मेदार नागरिक हैं। उन्हें भी अपने मताधिकार का प्रयोग करने का पूरा अधिकार और समान अवसर मिलना चाहिए। यदि किसी कार्मिक की ड्यूटी उसके अपने मतदान के दिन ही लगा दी जाती है और वह चाहकर भी वोट नहीं डाल पाता है, तो यह एक गंभीर व्यावहारिक समस्या है। इसलिए जिला प्रशासन को ड्यूटी आवंटन से पहले कार्मिकों के मतदान क्षेत्र और चरण का अनिवार्य रूप से सत्यापन करना चाहिए।
वहीं, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश विश्नोई ने जिला प्रशासन से इस संवेदनशील मांग पर जल्द से जल्द सकारात्मक विचार करने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि कार्मिकों की ड्यूटी का चरणवार उचित समायोजन करके एक तरफ जहाँ निष्पक्ष एवं सुचारु निर्वाचन कार्य संपन्न कराया जा सकता है, वहीं दूसरी तरफ कार्मिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की भी पूरी रक्षा हो सकती है। महासंघ ने पूरी दृढ़ता के साथ मांग की है कि किसी भी कार्मिक को निर्वाचन दायित्वों के निर्वहन के चलते अपने वोट के अधिकार से वंचित न रहना पड़े।

