शिक्षा के अधिकार पर ‘सियासी संग्राम, अशोक गहलोत का भजनलाल सरकार पर तीखा हमला, 900 करोड़ के बकाया ने अटकाया बच्चों का भविष्य

शिक्षा के अधिकार पर 'सियासी संग्राम
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quicjZaps 15 sept 2025

जयपुर, 20 फरवरी। राजस्थान में नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) के लिए ‘राइट टू एजुकेशन’ (RTE) के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ‘2 साल बनाम 5 साल’ के सुशासन के दावों पर सवाल उठाते हुए भजनलाल सरकार पर हमला बोला है। गहलोत का आरोप है कि सरकार की ‘असंवेदनशीलता’ के कारण प्रदेश में गरीब बच्चों की शिक्षा का आधार स्तंभ यानी आरटीई अब बदहाली की कगार पर पहुँच गया है। गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजी स्कूलों का बकाया भुगतान तुरंत नहीं किया, तो हजारों जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई अधर में लटक जाएगी।

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900 करोड़ का बकाया और स्कूलों का ‘बहिष्कार’
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के निजी स्कूलों ने नए प्रवेश रोकने की चेतावनी दी है। विवाद के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

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भुगतान में विफलता: गहलोत के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की फीस का लगभग 900 करोड़ रुपये सरकार की ओर से बकाया है।

शिक्षकों की चेतावनी: निजी स्कूल संचालकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक पिछला भुगतान (Reimbursement) नहीं होता, वे नए दाखिले नहीं लेंगे।

पेंडिंग एडमिशन: पिछले साल के लगभग 44 हजार बच्चों का प्रवेश अब तक पूरा नहीं हो सका है, जो सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है।

‘हमने दायरा बढ़ाया, इन्होंने बजट रोका’ – गहलोत
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में आरटीई का दायरा बढ़ाकर कक्षा 9 से 12 तक किया गया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो सरकार बच्चों की फीस नहीं भर सकती, उसके विकास के दावे खोखले हैं। उन्होंने मांग की कि एप्रोप्रिएशन बिल के माध्यम से इस समस्या का तत्काल समाधान निकाला जाए और सरकार स्कूलों के साथ अपनी ‘संवादहीनता’ को खत्म करे।

 

अभिभावकों का अल्टीमेटम और कानूनी पेंच
शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-27 के लिए आवेदन की तारीख 20 फरवरी से 4 मार्च तय की है, जिसकी लॉटरी 6 मार्च को निकलनी है। लेकिन धरातल पर स्थिति चुनौतीपूर्ण है:

अभिभावकों का विरोध: ‘संयुक्त अभिभावक संघ’ ने चेतावनी दी है कि यदि 44 हजार बच्चों का बैकलॉग क्लियर नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरेंगे।

नियमों पर रार: स्कूल संगठनों का तर्क है कि प्रति छात्र करीब 13 हजार रुपये की राशि वर्षों से लंबित है। साथ ही, वे हाईकोर्ट के आदेशों की स्पष्ट व्याख्या और भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

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