प्री-प्राइमरी आरटीई पुनर्भरण पर आर-पार की जंग, 15 अप्रैल तक समाधान नहीं होने पर निजी स्कूलों ने दी प्रवेश रोकने की चेतावनी
प्री-प्राइमरी आरटीई पुनर्भरण पर आर-पार की जंग



बीकानेर , 09 अप्रैल। शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं (PP-3, PP-4 और PP-5) के बकाया भुगतान को लेकर प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों और शिक्षा विभाग के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। ‘प्राइवेट स्कूल्स फेडरेशन’ के बैनर तले संचालकों ने गुरुवार को अतिरिक्त निदेशक (शिक्षा) शैलेंद्र देवड़ा को स्मरण पत्र सौंपकर अल्टीमेटम दिया है कि यदि 15 अप्रैल 2026 तक भुगतान के दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए, तो प्रदेश भर के निजी स्कूल इन कक्षाओं में नए प्रवेश नहीं देंगे।


फेडरेशन के सचिव गिरिराज खैरीवाल ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने 8 जनवरी 2026 को ही भुगतान के स्पष्ट आदेश जारी कर दिए थे, लेकिन विभाग की “हठधर्मिता” के कारण अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार अपनी नीति नहीं बदलती है, तो स्कूलों के पास प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह रोकने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचेगा।


स्मरण पत्र में उठाई गई प्रमुख मांगें:
बकाया किश्तों का भुगतान: सत्र 2025-26 की दोनों किश्तों का भुगतान इसी माह अप्रैल में एक साथ किया जाए।
पुराने अवरोध हटाना: सत्र 2018-19 से लेकर 2020-21 तक के भुगतान पर लगाए गए विभिन्न ‘बैरियर्स’ को हटाकर रोका गया पैसा तुरंत रिलीज किया जाए।
कोरोना काल का भुगतान: कोरोना महामारी के दौरान ऑफलाइन कक्षाएं संचालित करने वाले स्कूलों को बिना किसी शर्त के त्वरित भुगतान मिले।
पोर्टल पर सुधार: तकनीकी समस्याओं के कारण पोर्टल पर भौतिक सत्यापन रिपोर्ट अपलोड करने से वंचित रहे स्कूलों को एक अंतिम अवसर प्रदान किया जाए।
यूनिट कॉस्ट में वृद्धि: पिछले पांच वर्षों से यूनिट कॉस्ट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होने पर विरोध जताते हुए इसे वर्तमान महंगाई के अनुसार तर्कसंगत बनाने की मांग की गई।
शिक्षा विभाग में स्मरण पत्र सौंपने के दौरान प्रभुदयाल गहलोत, तरविन्दर सिंह कपूर, अशोक उपाध्याय और युवराज जैन सहित बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालक मौजूद रहे। संचालकों का कहना है कि आर्थिक संकट के चलते स्कूलों का संचालन अब चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है और वे अब विभाग की उदासीनता को और बर्दाश्त नहीं करेंगे।
