बीकानेर में विभिन्न तपस्याओं की अनुमोदना, गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर ने ‘शाश्वत सुख’ प्राप्ति का दिया संदेश

Ganivarya Mehul Prabh Sagar तपस्वियों का अभिनंदन समारोह संपन्न
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 13 अगस्त। सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट और अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई द्वारा सकल श्रीसंघ के सहयोग से आयोजित चातुर्मास में आज विभिन्न तपस्याओं की अनुमोदना की गई। गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर , मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, साध्वी दीपमाला श्रीजी व शंखनिधि के सान्निध्य में यह आयोजन हुआ।
प्रमुख तपस्याओं की अनुमोदना
आज कन्हैयालाल भुगड़ी की 48 दिन की चौविहार तपस्या (बिना अन्न-जल) की अनुमोदना की गई। इसके अतिरिक्त, “दादा दत्त सूरी” और सिद्धि तप, अक्षय निधि तप के तपस्वियों की भी अनुमोदना की गई। अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई के उपाध्यक्ष कमल सेठिया ने बताया कि:

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  • दत सूरी तप का समापन शुक्रवार, 15 अगस्त को जैन समाज के प्रमुख आगम कल्पसूत्र पर क्विज प्रतियोगिता के बाद होगा।
  • कन्हैयालाल भुगड़ी सहित सभी तपस्वियों का अभिनंदन 17 अगस्त को किया जाएगा।
  • अक्षय निधि तप में तपस्वी 15 दिन एकासना और संवत्सरि के दिन उपवास रखेंगे।
  • अक्षय निधि तप के साथ कई श्राविकाएं समोशरण और विजय कषाय तप भी कर रही हैं।
  • सिद्धि तप की साधिका किरण देवी बुच्चा और कोमल नाहटा की 7 की लड़ी की तपस्या चल रही है।

दादा दत्त सूरी तप में तपस्वियों ने 36 उपवास और 7 पारणें किए हैं। तप के समापन पर ढढ्ढा कोटड़ी से दादा की प्रतिमा को गाजे-बाजे के साथ लाभार्थी गुलाब चंद फतेहचंद खजांची के निवास पर ले जाया जाएगा।

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गणिवर्य का प्रवचन: शाश्वत सुख का लक्ष्य
गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने बुधवार को ढढ्ढा कोटड़ी में प्रवचन देते हुए कहा कि भगवान महावीर के शासन, संदेश और आदर्शों से प्रेरणा लेकर व्यक्ति को शाश्वत सुख की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ और प्रयास करने चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि भगवान के शासन में आराधना करने का लक्ष्य बहुत ज़रूरी है।

उन्होंने कहा कि “बिना लक्ष्य के जीवन का कोई अर्थ नहीं है। लक्ष्य से ही जीवन सार्थक बनता है।” गणिवर्य ने बताया कि हमारा एक ही लक्ष्य होना चाहिए – दीर्घकालीन सुखी बनना। उन्होंने समझाया कि किसी एक भव में मिलने वाला सुख प्रायः 60-65 वर्ष तक ही रहता है, और अगले भव में सुख की कोई गारंटी नहीं होती। इस प्रकार, सुख-दुख के चक्कर में अधिकांशतः दुख ही प्राप्त होता है। इसलिए, उन्होंने शाश्वत सुख प्राप्ति के लक्ष्य को लेकर साधना, आराधना और देव, गुरु व धर्म की भक्ति करने का संदेश दिया।

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