बीकानेर आरटीओ की मनमानी से वन टाइम टैक्स जमा होने पर भी ‘कर चुकता’ के नाम पर वसूली, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना
बीकानेर आरटीओ की मनमानी से वन टाइम टैक्स जमा होने पर भी 'कर चुकता' के नाम पर वसूली, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना


बीकानेर, 20 फरवरी। बीकानेर प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (RTO) में इन दिनों हल्के व्यावसायिक वाहन स्वामियों के लिए सरकारी नियमों से इतर एक नया ‘फरमान’ गले की फांस बन गया है। विभाग की तकनीकी खामियों की सजा आम जनता और छोटे वाहन चालकों को भुगतनी पड़ रही है। पिकअप, टैक्सी कार और जीप जैसे हल्के व्यावसायिक वाहनों, जिनका वन टाइम टैक्स (एकमुश्त कर) पहले ही जमा हो चुका है, उन्हें पोर्टल पर टैक्स अपडेट करने के नाम पर ‘कर चुकता प्रमाण पत्र’ (Tax Clearance Certificate) बनवाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह कार्रवाई न केवल वाहन स्वामियों पर आर्थिक बोझ डाल रही है, बल्कि परिवहन विभाग के ही उच्चाधिकारियों द्वारा पूर्व में जारी किए गए स्पष्ट आदेशों की खुली अवहेलना भी है।


आदेशों की ‘रद्दी’ बना रहे स्थानीय अधिकारी
हैरानी की बात यह है कि 17 फरवरी 2023 को तत्कालीन परिवहन शासन सचिव आनंद कुमार की अनुशंसा पर तत्कालीन आयुक्त के.एल. स्वामी ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इसके तहत वन टाइम टैक्स जमा वाहनों के लिए फिटनेस, स्वामित्व हस्तांतरण (Transfer of Ownership) सहित किसी भी कार्य के लिए कर चुकता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया था।


त्रुटि विभाग की, सजा जनता को: विभागीय पोर्टल पर टैक्स अपडेट न होना आरटीओ की तकनीकी विफलता है। लेकिन इसे ठीक करवाने के लिए चालकों से 100 रुपये की रसीद कटवाकर जबरन प्रमाण पत्र बनवाया जा रहा है।
दस्तावेज अटकाने का खेल: यदि कोई वाहन स्वामी इस अवैध प्रक्रिया का विरोध करता है, तो उसके वाहन के जरूरी लीगल दस्तावेज अटका दिए जाते हैं, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
अधिवक्ताओं ने खोला मोर्चा, जांच की मांग
बीकानेर के जागरूक नागरिकों और अधिवक्ताओं ने इस ‘अघोषित वसूली’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा, बनवारी लाल और कैलाश सियाग सहित कई कानूनविदों ने इस संदर्भ में प्रमुख शासन सचिव, परिवहन आयुक्त और जिला प्रशासन को पत्र लिखा है।
प्रमुख मांग: बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के पोर्टल पर टैक्स अपडेट किया जाए और पुराने आदेशों की अवहेलना करने वाले कार्मिकों व अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कमेटी बिठाकर कार्यवाही की जाए।
मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न: अधिवक्ताओं का तर्क है कि अपनी मेहनत की कमाई से घर चलाने वाले पिकअप और टैक्सी चालकों को इस तरह परेशान करना मोटर वाहन नियमों के विरुद्ध है।
