शिक्षा विभाग में मंत्रालयिक संवर्ग का केडर रिव्यू संपन्न: पदों के आवंटन के आदेश जारी, पदोन्नतियों का मार्ग प्रशस्त
कमल नारायण आचार्य


बीकानेर, 18 मार्च । राजस्थान के शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक श्री सीताराम जाट (IAS) ने मंत्रालयिक संवर्ग (Ministerial Cadre) के पदों के पुनर्गठन के तहत पदों के आवंटन और प्रत्याहरण (Allocation/Withdrawal) के विस्तृत आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश पदवार, मदवार, कार्यालयवार और शालावार प्रभावी होंगे।


कर्मचारी संघ के प्रयासों को मिली सफलता
शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ राजस्थान-बीकानेर के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य के अथक प्रयासों और सरकार के साथ उच्च स्तरीय वार्ताओं में बनी सहमति के बाद यह ऐतिहासिक निर्णय संभव हो पाया है। इस निर्णय से विभाग की प्रशासनिक संरचना में व्यापक बदलाव आएगा।


इन पदों पर मिलेगा पदोन्नति और वित्तीय लाभ
संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य और प्रदेश संस्थापक मदनमोहन व्यास ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि इस केडर रिव्यू से निम्नलिखित पदों पर पदोन्नति के नए अवसर खुलेंगे। संस्थापन अधिकारी (Establishment Officer) – राजपत्रित (Gazetted), प्रशासनिक अधिकारी (Administrative Officer) – राजपत्रित , अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी (Addl. Administrative Officer) – राजपत्रित , सहायक प्रशासनिक अधिकारी (Assistant Administrative Officer), वरिष्ठ सहायक (Senior Assistant)
लाभ: इन पदों पर पदोन्नति से न केवल कर्मचारियों का सामाजिक स्तर बढ़ेगा, बल्कि उन्हें उच्च स्तरीय पदों पर कार्य करने के अवसर के साथ-साथ महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ भी प्राप्त होगा। इससे विभाग की प्रशासनिक दक्षता में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित होगा।
प्रमुख मांगें: डीपीसी और लंबित प्रकरणों का निस्तारण
आदेश जारी होने के साथ ही आचार्य ने शिक्षा सचिव और निदेशक से कुछ महत्वपूर्ण मांगें भी दोहराई हैं-
तत्काल डीपीसी (DPC): निदेशालय स्तर पर राजपत्रित पदों और जिला-मंडल स्तर पर अन्य पदों के लिए 1 अप्रैल 2017 से रिव्यू डीपीसी तथा वर्ष 2025-26 की नियमित डीपीसी की तिथियां तुरंत निर्धारित की जाएं।
समय सीमा: पदोन्नति की समस्त कार्यवाही और कनिष्ठ सहायक (1986) की ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया सहित अन्य लंबित मांगों का निस्तारण 31 मार्च 2026 से पहले किया जाए। उद्देश्य: यह सुनिश्चित किया जाए कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पूर्व कोई भी पात्र कर्मचारी अपने न्यायोचित लाभों से वंचित न रहे।
