वयोवृद्ध साध्वीश्री सूरजकुमारी का लाडनूं में स्वर्गारोहण, 79 वर्षों की संयम साधना की हुई पूर्णाहूति
वयोवृद्ध साध्वीश्री सूरजकुमारी का लाडनूं में स्वर्गारोहण


लाडनूं, 19 फरवरी । जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ की वयोवृद्ध और तपस्वनी साध्वीश्री सूरजकुमारी जी का गुरुवार शाम करीब 4:45 बजे लाडनूं सेवा केंद्र में देवलोक गमन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के समाचार से लाडनूं के जैन समाज सहित पूरे तेरापंथ धर्मसंघ में शोक की लहर दौड़ गई है। साध्वीश्री पिछले कई वर्षों से लाडनूं स्थित सेवाकेंद्र में स्वास्थ्य लाभ ले रही थीं। विशेष बात यह है कि अभी मात्र दो दिन पूर्व ही आचार्य प्रवर श्री महाश्रमण जी ने स्वयं सेवाकेंद्र पधार कर उन्हें दर्शन दिए थे, जिससे वे स्वयं को धन्य महसूस कर रही थीं।



सादुलपुर से संयम पथ तक का सफर
साध्वीश्री सूरजकुमारी जी का जीवन त्याग और तपस्या की एक अनूठी मिसाल रहा है।


जन्म और दीक्षा: आपका जन्म संवत 1988 (सादुलपुर) के प्रतिष्ठित सिंघी परिवार में हुआ था। मात्र 15 वर्ष की अल्पायु में संवत 2003 (चुरू) में आपने संयम पथ को चुना था।
साधना के 79 वर्ष: उन्होंने अपने जीवन के करीब 8 दशक (79 वर्ष) एक आदर्श साध्वी के रूप में व्यतीत किए। उनका दीक्षा क्रमांक 1190 था।
कल निकलेगी अंतिम ‘प्रयाण यात्रा’
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, लाडनूं ने जानकारी देते हुए बताया कि साध्वीश्री की अंतिम विदाई (प्रयाण यात्रा) का कार्यक्रम निम्नानुसार रहेगा।
समय: शुक्रवार, 20 फरवरी 2026, प्रातः 8:30 बजे।
मार्ग: प्रयाण यात्रा वृद्ध साध्वी सेवा केन्द्र (पहली पट्टी), लाडनूं से रवाना होकर जोगीदड़ा मुक्तिधाम तक जाएगी।
समाज में शोक और श्रद्धा
लाडनूं की ‘आचार्यश्री महाश्रमण योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति’ और स्थानीय श्रावकों ने साध्वीश्री के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। थार एक्सप्रेस परिवार सहित समस्त श्रद्धालुगण ने उनके शीघ्र मोक्ष की कामना की है। प्रयाण यात्रा में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
