6 राज्यों के किसानों ने सीखा वैज्ञानिक भेड़-बकरी पालन का हुनर
6 राज्यों के किसानों ने सीखा वैज्ञानिक भेड़-बकरी पालन का हुनर


- बीकानेर में पशुपालन से स्वरोजगार की राह
बीकानेर, 23 फरवरी। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) में सोमवार को ‘वैज्ञानिक भेड़ एवं बकरी पालन’ विषय पर आयोजित सात दिवसीय उद्यमिता विकास प्रशिक्षण संपन्न हुआ। कृषि महाविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के 6 राज्यों के 87 पशुपालकों ने भाग लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पशुपालन को एक पारंपरिक व्यवसाय से बदलकर एक सफल उद्यम के रूप में स्थापित करना था।


वैज्ञानिक प्रबंधन और उद्यमिता पर जोर
समापन समारोह विश्वविद्यालय के आई.ए.बी.एम. सभागार में आयोजित किया गया।अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में केवल खेती पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। आय बढ़ाने के लिए किसानों को ‘समन्वित कृषि’ अपनानी होगी, जिसमें वैज्ञानिक पशुपालन एक मुख्य स्तंभ है।


तकनीक हस्तांतरण: अधिष्ठाता डॉ. विजय प्रकाश ने ‘सहभागिता मॉडल’ पर जोर देते हुए कहा कि पशुपालकों को नई तकनीकों को अपनाकर अपने व्यवसाय को व्यावसायिक रूप देना चाहिए ताकि वे दूसरों के लिए भी रोजगार पैदा कर सकें।
विविध नस्लों का ज्ञान और फील्ड भ्रमण
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव (Hands-on Training) भी दिया गया।
संस्थानों का दौरा: प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. शंकरलाल ने बताया कि किसानों को विश्वविद्यालय की समन्वित कृषि प्रणाली इकाई में सिरोही बकरी पालन और केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान में मगरा, चोकला व मारवाड़ी भेड़ों की नस्लों का अवलोकन करवाया गया।
विशेषज्ञ मार्गदर्शन: वेटरनरी विश्वविद्यालय (RAJUVAS) के विभिन्न फार्मों का भ्रमण करवाकर पशुपालकों को वैज्ञानिक पोषण, नियमित टीकाकरण और आधुनिक प्रबंधन की बारीकियां सिखाई गईं।
सरकारी योजनाओं और ऋण प्रक्रिया की जानकारी
प्रशिक्षण में शामिल जम्मू, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसानों को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करने के लिए बैंकिंग प्रक्रियाओं की भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर बैंक ऋण प्राप्त कर सकते हैं और अपना छोटा स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। डॉ. कुलदीप प्रकाश शिंदे ने अंत में सभी का आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय पिछले 14 महीनों में ऐसे 7 प्रशिक्षण आयोजित कर चुका है, जो पशुपालन क्षेत्र में कौशल विकास की ओर एक बड़ा कदम है।
