ऊंट पालन में उद्यमिता विकास पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न



बीकानेर, 29 अगस्त। भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर में पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज समापन हुआ। “दुधारू ऊँटों का प्रबंधन और ऊँट डेयरी में उद्यमिता विकास” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण में राजस्थान और मध्य प्रदेश के ऊँट पालकों ने हिस्सा लिया।
छोटे संसाधनों से शुरू करें व्यवसाय
समापन समारोह के मुख्य अतिथि, भाकृअनुप-राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, बीकानेर के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.सी. मेहता ने ऊँट पालकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे सीमित संसाधनों से भी ऊँट डेयरी का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। उन्होंने दूध पैकेजिंग की छोटी मशीनों, डीप फ्रीज़, और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने का सुझाव दिया। डॉ. मेहता ने ऊँटनी के दूध के औषधीय गुणों पर भी जोर दिया, जो मधुमेह, टीबी और ऑटिज्म जैसे रोगों के लिए फायदेमंद है। उन्होंने पशुओं के बेहतर प्रबंधन के लिए उन्हें अलग रखने, रोटेशनल चराई पद्धति अपनाने और विशेषज्ञों से सलाह लेने की सलाह दी।




ऊँट पालकों को मिला सहयोग का आश्वासन
एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि इस प्रशिक्षण से मिली जानकारी और व्यावहारिक ज्ञान ऊँट पालकों को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद करेगा। उन्होंने ऊँट पालकों को व्यवसाय में आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए एनआरसीसी के विशेषज्ञों से सहयोग लेने का आश्वासन दिया। परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य मेवाड़ी, मेवाती और मालवी ऊँट नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के लिए ऊँट पालकों को सशक्त बनाना है।


प्रशिक्षण से मिले नए अवसर
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. बसंती ज्योत्सना ने बताया कि प्रशिक्षण में ऊँट पालकों को प्रजनन, स्वास्थ्य प्रबंधन, दूध का प्रसंस्करण और वर्मीकम्पोस्ट बनाने जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गईं। प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने ऊँटनी के दूध से कुल्फी और घी जैसे उत्पाद बनाना सीखा। उन्होंने इस परियोजना के तहत मिल रहे सहयोग की सराहना की। मुख्य अतिथि और निदेशक महोदय ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। कार्यक्रम का संचालन वैज्ञानिक डॉ. विश्व रंजन उपाध्याय ने किया।