जोड़बीड़ में ‘मौत का जाल’ बनीं हाईटेंशन लाइनें, एक महीने में 12 से अधिक प्रवासी पक्षियों की करंट से मौत
जोड़बीड़ में 'मौत का जाल' बनीं हाईटेंशन लाइनें, एक महीने में 12 से अधिक प्रवासी पक्षियों की करंट से मौत


बीकानेर, 20 फरवरी। दक्षिण एशिया के सबसे बड़े गिद्ध एवं शिकारी पक्षी आवास स्थल जोड़बीड़ गिद्ध संरक्षण क्षेत्र से इन दिनों बेहद चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। यहाँ से गुजर रही बिजली की हाईटेंशन लाइनें और खुले विद्युत पोल प्रवासी पक्षियों के लिए काल साबित हो रहे हैं। पिछले महज एक महीने के भीतर करंट की चपेट में आने से एक दर्जन से अधिक स्टेपी ईगल, इजिप्शियन वल्चर और यूरेशियन ग्रेफॉन जैसे बेशकीमती पक्षियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित इस स्थल की सुरक्षा व्यवस्था और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।


खुले तारों ने छीनी प्रवासी मेहमानों की सांसें
वर्तमान में जोड़बीड़ में मध्य एशिया, रूस, मंगोलिया और यूरोप से आए हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा है। विशेषज्ञों के अनुसार:


खतरनाक बनावट: ये शिकारी पक्षी आकार में बड़े होते हैं और इनके पंखों का फैलाव अधिक होता है। भोजन की तलाश में जब ये विद्युत पोलों पर बैठते हैं, तो इनके पंख खुले तारों को छू जाते हैं, जिससे उन्हें घातक करंट लगता है।
शहरीकरण का दबाव: संरक्षण क्षेत्र के आसपास तेजी से विकसित हो रही नई आवासीय कॉलोनियों और बढ़ते बिजली के ढांचे ने पक्षियों के सुरक्षित गलियारे को ‘डेथ जोन’ में बदल दिया है।
संरक्षणवादियों की चेतावनी: ‘इंसुलेशन’ ही एकमात्र समाधान
इजिप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) पहले ही संकटग्रस्त श्रेणी में है और स्टेपी ईगल की आबादी भी वैश्विक स्तर पर घट रही है। पर्यावरणविदों और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स ने सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है:
अंडरग्राउंड लाइनें: नई कॉलोनियों में बिजली की लाइनों को अनिवार्य रूप से भूमिगत किया जाए।
सुरक्षा उपकरण: मौजूदा ओवरहेड लाइनों पर बर्ड डाइवर्टर और इंसुलेटेड क्रॉस-आर्म्स लगाए जाएं, जिससे पक्षी सुरक्षित रह सकें।
उम्मीद की किरण: जोड़बीड़ में दिखा दुर्लभ ‘गरुड़’ और लोमड़ी का परिवार
त्रासदियों के बीच जोड़बीड़ से कुछ सुखद और रोमांचक खबरें भी मिली हैं:
सफेद पूंछ वाली समुद्री चील: वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञ जितेन्द्र सोलंकी के अनुसार, यहाँ विश्व की सबसे बड़ी ‘सफेद पूंछ वाली समुद्री चील’ देखी गई है, जिसे गरुड़ भी कहा जाता है। यह पक्षी ग्रीनलैंड और जर्मनी की तरफ से शीतकालीन प्रवास पर पहुँचा है, जो पक्षी प्रेमियों के लिए शोध का विषय है।
डेजर्ट फॉक्स की कॉलोनी: क्षेत्र में विलुप्तप्राय होती डेजर्ट फॉक्स (मरुस्थलीय लोमड़ी) की एक नई कॉलोनी भी मिली है। हाल ही में एक लोमड़ी को अपने तीन शावकों के साथ सुरक्षित घूमते देखा गया, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।
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