विकसित भारत-2047 पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ

विकसित भारत-2047 पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ
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बीकानेर , 18 अक्टूबर। भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद एवं महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “विकसित भारत-2047’’ का शुभारंभ आज विश्वविद्यालय के संत मीराबाई सभागार में हुआ।  संगोष्ठी का शुभारंभ प्रो. ए. पी. पाढ़ी, पूर्व अध्यक्ष ईप्सा, पूर्व कुलपति बहरमपुर विश्वविद्यालय, ओड़िसा, प्रो एम.एल.छिम्पा, पूर्व कुलपति अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल, प्रो. सोमा भौमिक, उपाध्यक्ष ईप्सा, कुलपति विलिमय कैरी विश्वविद्यालय, शिलांग, मेघालय, प्रो. के. जयप्रसाद, पूर्व कुलपति केन्द्रीय विश्वविद्यालय केरला ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. गीताजंलि दास, कुलपति बहरमपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा, महासचिव प्रो. संजीव कुमार शर्मा, पूर्व कुलपति महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतीहारी बिहार एवं विश्वविद्यालय कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित उपस्थित रहे।

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संगोष्ठी के आरंभ में विश्वविद्यालय कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने शाब्दिक स्वागत करते हुए कहा कि देश भर से आये शिक्षाविदों की उपस्थिति से विश्वविद्यालय में एक लघु भारत की संकल्पना साकार हो रही है। विश्वविद्यालय के लिए यह गौरव का विषय है कि देश-विदेश के शिक्षाविदों का इस शैक्षणिक महाकुंभ के अवसर पर विश्वविद्यालय में आगमन हुआ है। उन्होनें विश्वविद्यालय के पथ-प्रदर्शक महाराजा गंगासिंह जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बीकानेर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान एवं परम्पराओं से प्रतिभागियों को अवगत करवाया। भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के महासचिव प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने परिषद की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की और सदन को बताया कि भारत के समस्त राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के 1300 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण करवाकर आज तक के सबसे बडे़ आयोजन को साकार किया है। उन्होनें महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिभागियों के लिए की गई व्यवस्थाओं के लिए विश्वविद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया।

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अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर मंचासीन अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई स्मारिका ’’मरू गंगा’’ एवं संगोष्ठी में भाग ले रहे 25 से अधिक प्रतिभागियों की शोध एवं अकादमिक पुस्तकों का विमोचन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से विश्वविद्यालय कुलपति आचार्य मनोज कुमार दीक्षित एवं प्रो. कौशल किशोर मिश्रा द्वारा लिखित पुस्तक ’’ मोर्नाकी इन मनुस्मृति ’’ का विमोचन भी किया गया। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्रो. जुगल किशोर मिश्रा, बहरमपुर विश्वविद्यालय, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से सर्वश्रेष्ठ शोधार्थी का पुरस्कार श्रेया घोष, सीनीयर शोधार्थी का पुरस्कार डाॅ. अजय कुमार सिंह, फीमेल राजनीति शास्त्री का पुरस्कार प्रो. वंदना मिश्रा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र का पुरस्कार गुवाहाटी की पूर्ण कान्ता टाॅय एवं प्रो. अनसूईया नैन, केरला विश्वविद्यालय को दिया गया।

 

कार्यक्रम के अंत में भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद की अध्य़क्ष ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए विकसित भारत की संकल्पना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि विकसित भारत का विजन एक समृद्ध भारत के निर्माण की संकल्पना करता है तथा सभी क्षेत्रों के सभी नागरिकों को अपनी क्षमता तक पहुंचने का अवसर प्रदान करता है। उन्होनें विकसित भारत की संकल्पना में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति के माध्यम से यह सपना साकार हो सकता है। उन्होनें शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका के बारे में भी अपनी बात रखी। साथ ही अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में मिले सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में स्थानीय आयोजन सचिव डाॅ. धर्मेश हरवानी एवं डाॅ. मेघना शर्मा ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अनसुईया नैन ने किया।

 

संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता को सम्बोधित करते हुए प्रो. ए. पी. पाढ़ी ने विकसित भारत-2047 के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए कहा कि कोई भी राष्ट्र तभी विकसित होता है। जब उसके लोगों का विकास होता है। उन्होने विकसित भारत के साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर विश्वविद्यालय के छात्रों एवं युवाओं की ऊर्जा को दिशा देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होने कहा कि युवा वर्ग इसे आंदोलन समझ कर अपने जीवन में परिवर्तनकारी एजेंडा शामिल कर अपनी भूमिका सुनिश्चित करें। उन्होने भारत के प्रत्येक विश्वविद्यालय एवं काॅलेज में इस हेतु विशेष अभियान चलाने का सुझाव दिया। दूसरे तकनीकी सत्र में प्रो. एस. पी. शाही , कुलपति मगध विश्वविद्यालय, प्रो. अजमेर सिंह मलिक, कुलपति चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा ने भारतीय राजनीति विज्ञान का भारत में भविष्य विषय पर अपना व्याख्यान दिया। संगोष्ठी में प्रो. एम.एस. चतुर्वेदी मेमोरियल व्याख्यान का भी आयोजन हुआ जिसमें प्रो. कुलदीप चन्द्र अग्निहोत्री ने अपना व्याख्यान दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन प्रो. एम.एल. छिम्पा पूर्व कुलपति अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविधालय ने दिया।

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