पीबीएम ट्रॉमा सेंटर में क्लबफुट पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला, बिना ऑपरेशन ठीक होंगे जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पांव
पीबीएम ट्रॉमा सेंटर में क्लबफुट पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला, बिना ऑपरेशन ठीक होंगे जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पांव


बीकानेर, 17 फरवरी। बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग और ‘क्योर इंडिया इंटरनेशनल’ के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को पीबीएम ट्रॉमा सेंटर में एक विशेष अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “क्लबफुट प्लास्टर प्रबंधन” विषय पर आधारित इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह संदेश दिया कि जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पांवों (क्लबफुट) का इलाज अब बिना किसी जटिल ऑपरेशन के केवल पोन्सेटी विधि (विशेष प्लास्टर तकनीक) द्वारा पूरी तरह संभव है।


कार्यशाला का मुख्य आकर्षण अमेरिका (फ्लोरिडा) से आए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ कार्लटन ब्रूस स्मिथ रहे। उन्होंने राजस्थान में अपने पहले प्रदर्शन के लिए बीकानेर को चुना और युवा चिकित्सकों को इस प्रभावी तकनीक के व्यावहारिक गुर सिखाए।


पोन्सेटी विधि: बिना ऑपरेशन बच्चों को मिलेगा सामान्य जीवन
ट्रॉमा सेंटर निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. बी. एल. खजोटिया ने कार्यशाला की शुरुआत करते हुए कहा कि क्लबफुट एक ऐसी जन्मजात विकृति है जिसे लेकर समाज में जागरूकता की कमी है। उन्होंने बताया कि यदि बच्चा पैदा होते ही प्रारंभिक अवस्था में इलाज शुरू कर दिया जाए, तो पोन्सेटी पद्धति से शत-प्रतिशत सुधार संभव है। यह तकनीक न केवल सरल है, बल्कि विश्व स्तर पर सबसे प्रभावी मानी जाती है।
अमेरिकी विशेषज्ञ ने किए लाइव प्लास्टर, माताओं को दी सलाह
फ्लोरिडा के विशेषज्ञ ब्रूस स्मिथ ने कार्यशाला में ‘पिरानी स्कोरिंग’ प्रणाली और ब्रेस (विशेष जूते) के प्रोटोकॉल पर विस्तृत वैज्ञानिक व्याख्या दी।
लाइव प्रदर्शन: स्मिथ ने स्वयं पीबीएम ट्रॉमा सेंटर में उपचाराधीन बच्चों की जांच की और उनके पैरों पर क्रमिक प्लास्टर (Serial Casting) चढ़ाकर तकनीक का प्रदर्शन किया।
अपील: उन्होंने माताओं से अपील की कि जैसे ही बच्चे के पैरों में विकृति दिखे, तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। सही समय पर की गई ‘मोल्डिंग तकनीक’ भविष्य की बड़ी जटिलताओं को रोक सकती है।
अंतरराष्ट्रीय सहभागिता: इस कार्यशाला में इंग्लैंड के रेजिडेंट चिकित्सक हेनरी टिम्बर वर्गीस वुड ने भी हिस्सा लिया और भारतीय चिकित्सा अनुभव को साझा किया।
निशुल्क सुविधाएं और विस्तार की योजना
क्योर इंडिया इंटरनेशनल के राजस्थान कॉर्डिनेटर शुभाशीष गिरायन ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर लगभग 7000 बच्चे उपचाराधीन हैं।
नया नेटवर्क: जल्द ही चुरू, बाड़मेर, झालावाड़ और भीलवाड़ा में भी क्लबफुट के नए केंद्र शुरू किए जाएंगे।
निशुल्क इलाज: जिला कॉर्डिनेटर कोमल वर्मा ने जानकारी दी कि बीकानेर केंद्र पर अब तक 1500 बच्चों का पंजीकरण हो चुका है, जिन्हें प्लास्टर, विशेष जूते और अन्य उपकरण पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एल. के. कपिल ने अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से सरकारी अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता विश्वस्तरीय होगी, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को नई जिंदगी मिल सकेगी।
