बीकानेर में जल्द शुरू होगा ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र, कुलगुरु प्रोफेसर दुबे ने एफआईएमटीटीसी का किया निरीक्षण

बीकानेर में जल्द शुरू होगा ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र, कुलगुरु प्रोफेसर दुबे ने एफआईएमटीटीसी का किया निरीक्षण
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बीकानेर, 17 फरवरी। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) अब आधुनिक कृषि तकनीक के केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त होने जा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने मंगलवार को फार्म इंप्लीमेंट्स एंड मशीनरी टेस्टिंग एंड ट्रेनिंग सेंटर (एफआईएमटीटीसी) का विस्तृत निरीक्षण किया और भविष्य की योजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।

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निरीक्षण के दौरान कुलगुरु ने केंद्र में चल रहे कृषि यंत्रों के परीक्षण और प्रशिक्षण गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि यह केंद्र भारत सरकार के कड़े मापदंडों के अनुरूप कार्य कर रहा है, जिससे कृषि यंत्र निर्माता कंपनियों के साथ-साथ किसानों और विद्यार्थियों को भी सीधा लाभ मिल रहा है।

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ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट पर जोर
कुलगुरु डॉ. दुबे ने केंद्र प्रशासन को ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र अविलंब प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेती में आधुनिकतम तकनीक के उपयोग के लिए ‘कौशल विकास’ (Skill Development) पहली आवश्यकता है।

युवाओं को अवसर: ड्रोन प्रशिक्षण से क्षेत्र के युवा किसानों को नई तकनीक सीखने और रोजगार के अवसर सृजित करने में मदद मिलेगी।

सर्टिफिकेट कोर्स: इसके साथ ही उन्होंने लेजर लेवलर सर्टिफिकेट कोर्स को भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने को कहा।

कस्टम हायरिंग सेंटर: केंद्र में कस्टम हायरिंग सुविधाओं के दौरान निर्धारित नियमों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

लाइव टेस्टिंग और लैब का अवलोकन
कुलगुरु ने केंद्र में स्थापित सीड फर्टिलाइजर ड्रिल लैब और लेजर लेवलर परीक्षण की लाइव प्रक्रिया देखी। उन्होंने मशीनों की गुणवत्ता जांच और रिपोर्ट तैयार करने की वैज्ञानिक विधि की भी जानकारी ली। अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने कहा कि केंद्र की आय सृजन गतिविधियां विश्वविद्यालय के विकास में सहायक सिद्ध हो रही हैं।

विशेषज्ञों का प्रजेंटेशन और फीडबैक
इंजीनियर विपिन लड्ढा ने केंद्र की गतिविधियों पर आधारित एक प्रजेंटेशन दिया और बताया कि यहाँ विद्यार्थियों को ‘हैंड्स ऑन ट्रेनिंग’ (प्रायोगिक प्रशिक्षण) के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं। केंद्र प्रभारी डॉ. विक्रम योगी ने कुलगुरु को अवगत कराया कि केंद्र लगातार एग्रीकल्चर मैन्युफैक्चरर्स के संपर्क में है और नई तकनीक की मशीनों की टेस्टिंग का कार्य पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है।

कुलगुरु ने अंत में निर्देश दिए कि किसानों और विद्यार्थियों के बीच नियमित रूप से संवाद और प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि विश्वविद्यालय के अनुसंधान का लाभ सीधे खेतों तक पहुँच सके।

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