फलोदी के जांबा क्षेत्र में ऊँटों की रहस्यमयी मौत: जांच के लिए पहुंची एनआरसीसी की विशेषज्ञ टीम
फलोदी के जांबा क्षेत्र में ऊँटों की रहस्यमयी मौत


बीकानेर/फलोदी, 12 फ़रवरी । फलोदी जिले की ग्राम पंचायत जांबा और आसपास के क्षेत्रों में ऊँटों में फैली एक अज्ञात बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में कई ऊँटों की आकस्मिक मृत्यु की सूचना मिलने के बाद, भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC), बीकानेर की एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ टीम गुरुवार को प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची। टीम ने मोताई, जांबा की ढाणी और सिदा क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए गहन जांच शुरू की है।


केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश रंजन ने बताया कि स्थानीय ग्राम प्रधान और जागरूक किसानों के माध्यम से ऊँटों की मौत की सूचना मिली थी। आर्थिक नुकसान और पशु हानि को रोकने के लिए एनआरसीसी ने इसे गंभीरता से लिया है। वैज्ञानिक डॉ. सागर अशोक खुलापे के नेतृत्व में टीम ने प्रभावित क्षेत्रों से लगभग 50 ऊँटों के रक्त के नमूने और श्वसन तंत्र के स्राव (रेस्पिरेटरी स्वैब्स) एकत्र किए हैं। इन नमूनों को एनआरसीसी की आधुनिक प्रयोगशाला में वायरस, बैक्टीरिया और अन्य संभावित संक्रमणों की पहचान के लिए भेजा गया है।


बीमार ऊँटों का उपचार और पशुपालकों को सलाह
वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. काशी नाथ ने फील्ड में मौजूद बीमार ऊँटों का लक्षणों के आधार पर प्राथमिक उपचार किया। उन्होंने पशुपालकों को संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और विशेष देखभाल करने के निर्देश दिए हैं।
एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिक टीम के माध्यम से ऊँट पालकों को आश्वस्त किया है कि केंद्र उष्ट्र प्रजाति के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में केंद्र की टीम त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करती है ताकि पशुपालकों की आजीविका पर संकट न आए।
संस्थान की त्वरित कार्रवाई पर जताया आभार
क्षेत्र के प्रगतिशील किसान और शिक्षक गेम्पर राम बिश्नोई ने एनआरसीसी की टीम द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले भी संस्थान का सहयोग सराहनीय रहा है और इस कठिन समय में वैज्ञानिकों का समय पर पहुंचना पशुपालकों के लिए बड़ी राहत है। जांच दल में केंद्र के श्री अमित ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया। अब सभी की नजरें प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे बीमारी के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
