अच्छे बच्चों का निर्माण कैसे करें विषय पर संगोष्ठी संपन्न, डॉ. बिनानी ने दिया संस्कारों के सिंचन का संदेश

अच्छे बच्चों का निर्माण कैसे करें विषय पर संगोष्ठी संपन्न, डॉ. बिनानी ने दिया संस्कारों के सिंचन का संदेश
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बीकानेर (नापासर), 12 फ़रवरी । स्थानीय राजकीय कन्या महाविद्यालय में “अच्छे बच्चों का निर्माण कैसे करें” विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. घनश्याम बिठू के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध व्यवसायी शंकर लाल मूंधड़ा थे, जबकि अध्यक्षता प्रख्यात चिंतक, लेखक और पूर्व प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने की। संगोष्ठी का शुभारंभ सामूहिक सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसके बाद संयोजक डॉ. आर.एन. बिश्नोई ने अतिथियों का परिचय और स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।

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अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने वर्तमान दौर में पालन-पोषण की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल बौद्धिक विकास से संतोष करना पर्याप्त नहीं है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को बुद्धि के साथ-साथ उच्च भावयुक्त संस्कारों से भी संचित करें। डॉ. बिनानी ने विशेष रूप से मातृ शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों के चरित्र निर्माण में माताओं की भूमिका सर्वाधिक प्रभावी होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्कार सिखाए नहीं जाते, बल्कि आचरण से दिखाए जाते हैं।

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आचरण ही सबसे बड़ी शिक्षा: डॉ. बिनानी
प्रोफेसर बिनानी ने मनोवैज्ञानिक तथ्य साझा करते हुए कहा कि “बच्चे वह नहीं करते जो आप कहते हैं, बल्कि वे वह करते हैं जो आप स्वयं करते हैं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे आपके पैर छुएं, तो आपको प्रतिदिन अपने माता-पिता के चरण स्पर्श करने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख से कही गई बात की तुलना में जीवन में करके दिखाई गई बातों का प्रभाव बच्चों के मानस पटल पर स्थायी होता है।

राष्ट्र निर्माण और सर्वांगीण विकास पर जोर
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि शंकर लाल मूंधड़ा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में जनकल्याण की भावना होनी चाहिए, क्योंकि यही भावना अंततः राष्ट्र निर्माण का आधार बनती है। वहीं, प्राचार्य डॉ. घनश्याम बिठू ने शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि बच्चे का सर्वांगीण विकास है। उन्होंने विद्यार्थियों को धैर्य और कठिन परिश्रम के साथ जीवन में एक निश्चित लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी।

संगोष्ठी के दौरान सहायक आचार्य डॉ. आर.एन. बिश्नोई ने टालमटोल की प्रवृत्ति को त्यागकर ‘आज’ में कार्य करने के स्वभाव पर बल दिया। गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष श्रीमती रूबी स्वामी ने भी राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महती भूमिका के बारे में विस्तार से बताया।

उपस्थिति और आभार
इस गरिमामय कार्यक्रम में डॉ. सुखपाल कौर, डॉ. दीपा सेठी, डॉ. वंदना शुक्ला, श्रीमती काजल बोहरा सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. आर.एन. बिश्नोई द्वारा किया गया और अंत में छात्राओं ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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