व्यक्तित्व विकास ही सफलता की कुंजी, गंगाशहर में ‘कैसे बनें स्वयं के ट्रस्टी’ कार्यशाला संपन्न
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बीकानेर/गंगाशहर, 7 फ़रवरी। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (ABTYP) के निर्देशानुसार, तेरापंथ युवक परिषद (तेयुप) गंगाशहर द्वारा शनिवार, 7 फरवरी को ‘कैसे बनें स्वयं के ट्रस्टी’ विषय पर एक प्रभावी व्यक्तित्व विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। शांतिनिकेतन में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी श्री विशदप्रज्ञा जी एवं साध्वी श्री लब्धियशा जी के पावन सानिध्य में मंगल गान के साथ हुआ।


कार्यशाला की मुख्य प्रशिक्षक साध्वी श्री विधि प्रभा जी ने अत्यंत सरल और सुलभ भाषा में उपस्थित श्रावकों को व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तित्व केवल महंगे कपड़ों या आभूषणों का मोहताज नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का प्रतिबिंब है। साध्वी जी ने सोशल, मेंटल और स्पिरिचुअल पर्सनालिटी को निखारने के व्यावहारिक सूत्र दिए, जिन्हें सुनकर उपस्थित जनसमूह अभिभूत हो गया।


चहुंमुखी विकास के लिए निरंतर प्रयास जरूरी
साध्वी श्री लब्धियशा जी ने विषय की गहनता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्तित्व विकास एक सतत प्रक्रिया है और इसके लिए परिषद को भविष्य में भी ऐसी अनेक कार्यशालाओं का आयोजन करना चाहिए। वहीं, साध्वी श्री विशदप्रज्ञा जी ने गंगाशहर तेयुप के कार्यकर्ताओं के जोश और जज्बे की सराहना की। उन्होंने बताया कि बोलने की कला और आत्मविश्वास के माध्यम से व्यक्ति अपना चहुंमुखी विकास कर सकता है।
समाज की प्रतिभाओं को तराशने का संकल्प
कार्यक्रम के अंतिम चरण में तेयुप गंगाशहर के अध्यक्ष ललित राखेचा ने सभी का आभार व्यक्त किया, जबकि कुशल संचालन उपाध्यक्ष देवेंद्र डागा ने किया। कार्यशाला के प्रभारी मयंक सेठिया ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“इस तरह के आयोजनों का मुख्य ध्येय समाज की छिपी हुई प्रतिभाओं को विकसित कर उन्हें आगे बढ़ाना है। तेयुप गंगाशहर भविष्य में भी अभातेयुप द्वारा निर्देशित ऐसे रचनात्मक कार्यक्रमों को पूरी निष्ठा के साथ आयोजित करता रहेगा।” कार्यशाला की सफलता को देखते हुए समाज के लोगों ने परिषद के प्रयासों की प्रशंसा की और नियमित अंतराल पर ऐसे प्रेरक कार्यक्रमों की मांग दोहराई।
