राजस्थान में निजी बसों का ‘महा-चक्का जाम’, RTO की सख्ती के खिलाफ 35 हजार बसें बंद, 25 लाख यात्री बेहाल
राजस्थान में निजी बसों का 'महा-चक्का जाम', RTO की सख्ती के खिलाफ 35 हजार बसें बंद, 25 लाख यात्री बेहाल


जयपुर/बीकानेर, 24 फ़रवरी । राजस्थान में परिवहन विभाग और निजी बस ऑपरेटरों के बीच टकराव अब चरम पर पहुंच गया है। RTO (परिवहन कार्यालय) द्वारा की जा रही लगातार कार्रवाई, आरसी सस्पेंड करने और भारी-भरकम चालानों के विरोध में प्रदेशभर के निजी बस संचालकों ने सोमवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के कारण राजस्थान की सड़कों से करीब 30 से 35 हजार निजी बसें गायब हैं, जिससे प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शादियों के सीजन और पर्यटन के व्यस्त समय में हुई इस हड़ताल ने लाखों यात्रियों की योजना पर पानी फेर दिया है। खास तौर पर ग्रामीण रूटों और लंबी दूरी के सफर के लिए निजी बसों पर निर्भर रहने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


क्यों थमे पहिए? ऑपरेटर्स की प्रमुख मांगें
बस ऑपरेटर्स का कहना है कि परिवहन विभाग स्लीपर बसों और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों पर जानबूझकर दमनकारी कार्रवाई कर रहा है। बस यूनियन के प्रतिनिधि आशीष शेट्टी के अनुसार, विभाग न केवल लाखों के चालान काट रहा है, बल्कि बीच रास्ते में सवारियों को उतारकर बसें सीज कर रहा है, जो अमानवीय और नियम विरुद्ध है।


ऑपरेटर्स की मुख्य मांगें:
RC बहाली: सस्पेंड की गई बसों की आरसी (पंजीकरण) तत्काल बहाल की जाए।
सीज कार्रवाई पर रोक: यात्रियों को बीच रास्ते उतारकर बसें सीज करने की प्रक्रिया बंद हो।
टैक्स में रियायत: AIPP परमिट टैक्स को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तर्ज पर कम किया जाए।
धारा 153 का विरोध: मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 153 के तहत की जा रही ‘मनमानी’ कार्रवाई पर रोक लगे।
हड़ताल का व्यापक असर: 20 करोड़ का रिफंड और यात्री संकट
हड़ताल का प्रभाव केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है; इसे मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के ऑपरेटर्स ने भी समर्थन दिया है।
यात्री संकट: प्रदेश में रोजाना करीब 25 लाख यात्री निजी बसों में सफर करते हैं, जो अब रोडवेज की सीमित बसों या महंगे निजी साधनों पर निर्भर हैं।
आर्थिक नुकसान: करीब 3 लाख यात्रियों ने ऑनलाइन बुकिंग कराई थी। हड़ताल के कारण बस संचालकों को लगभग 20 करोड़ रुपये का रिफंड करना पड़ेगा।
प्रभावित क्षेत्र: जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर जैसे बड़े केंद्रों में स्थिति सबसे ज्यादा विकट है।
प्रशासन और ऑपरेटर्स के बीच वार्ता विफल
सोमवार को सरकार और यूनियन के बीच हुई सुलह की कोशिशें नाकाम रहीं, जिसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया। जयपुर आरटीओ प्रथम और द्वितीय की कार्रवाई से बस संचालक विशेष रूप से आक्रोशित हैं। ऑपरेटर्स ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, बसें सड़कों पर नहीं लौटेंगी। प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर रोडवेज की अतिरिक्त बसें चलाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन निजी बसों के विशाल नेटवर्क के सामने ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
