बीकानेर के रवि पुरोहित ‘डॉ. के. आर. कल्याण रामन राष्ट्रीय सम्मान’ से विभूषित
बीकानेर के रवि पुरोहित 'डॉ. के. आर. कल्याण रामन राष्ट्रीय सम्मान' से विभूषित


साहित्य मंडल नाथद्वारा का पाटोत्सव


नाथद्वारा/बीकानेर , 9 फ़रवरी । पुष्टिमार्गीय आस्था के केंद्र श्रीनाथजी के पाटोत्सव के उपलक्ष्य में, साहित्य मंडल नाथद्वारा द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में बीकानेर के प्रख्यात साहित्यकार रवि पुरोहित को ‘डॉ. के. आर. कल्याण रामन राष्ट्रीय सम्मान’ से नवाजा गया है। श्री भगवती प्रसाद देवपुरा प्रेक्षागृह में आयोजित इस समारोह में संस्था ने पुरोहित को उनकी विशिष्ट साहित्यिक और सामाजिक सेवाओं के लिए ‘साहित्य विभूषण’ की मानद उपाधि से भी अलंकृत किया।


संस्था के प्रधानमंत्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने बताया कि सम्मेलन के नौवें सत्र में यह सम्मान प्रदान किया गया। रवि पुरोहित की सामाजिक, साहित्यिक, शोधपरक एवं संपादकीय क्षेत्र में दी गई विशिष्ट सेवाओं और उपलब्धियों को इस राष्ट्रीय पुरस्कार का आधार बनाया गया है। गौरतलब है कि पुरोहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी लेखनी का लोहा मनवा चुके हैं और वर्ष 2017-18 में ‘इंटरनेशनल पोइटिक प्रोजेक्ट पोलैंड’ में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
पुरोहित की उपलब्धियां और नई पहल
रवि पुरोहित इससे पूर्व साहित्य अकादमी (दिल्ली), राजस्थान साहित्य अकादमी (उदयपुर), और राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी (बीकानेर) सहित देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं से समादृत हो चुके हैं। सम्मान ग्रहण करने के पश्चात, उन्होंने एक अनुकरणीय पहल करते हुए अपने पितामह, प्रख्यात शिक्षाविद और साहित्यकार पं. भीष्मदेव राजपुरोहित की स्मृति में एक नए पुरस्कार की घोषणा की। साहित्य मंडल के माध्यम से अब प्रतिवर्ष ‘पं. भीष्मदेव राजपुरोहित स्मृति शिक्षा साहित्य सम्मान’ प्रदान किया जाएगा।
समारोह में अन्य विभूतियों का सम्मान
पाटोत्सव के इस गरिमामय अवसर पर देश के अन्य भागों से आए विद्वानों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। श्रीडूंगरगढ़ के डॉ. चेतन स्वामी को ‘ब्रज कांत साहित्य सम्मान’ से नवाजा गया, जबकि तमिलनाडु के एम. श्रीधर को ‘कमलादेवी अग्निहोत्री स्मृति सम्मान’ प्रदान किया गया। इसी क्रम में आगरा के रमेश पंडित को ‘पं. विश्वम्भर दयाल दौनेरिया सम्मान’ और सरदारशहर के विश्वनाथ तंवर को ‘श्रीमती शारदा देवी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह आयोजन भारतीय साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ।
