साध्वीश्री जिनबालाजी का मंगल भावना समारोह आयोजित


- स्वाध्याय और धर्म ही जीवन का सच्चा आधार—साध्वीश्री
बीकानेर/भीनासर ,18 जनवरी । आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री जिनबालाजी के पावन सान्निध्य में सोमवार को तेरापंथ सभा भवन, भीनासर के प्रांगण में ‘मंगल भावना’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। सात माह के प्रवास के उपरांत आयोजित इस विदाई सह मंगल भावना समारोह में साध्वीश्री ने श्रावक-श्राविकाओं को धर्म के मार्ग पर अडिग रहने का पाथेय प्रदान किया।


साध्वीश्री जिनबालाजी ने अपने संबोधन में गुरु के उत्तरदायित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि एक सच्चे गुरु और साधु का कर्तव्य गृहस्थों को केवल उपदेश देना नहीं, बल्कि उन्हें स्वाध्याय, जप, तप और संयम के मार्ग पर अग्रसर करना है। उन्होंने ‘योग क्षेम वर्ष’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित समाज से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक माह गुरुदेव के सान्निध्य में सेवा कार्य हेतु समर्पित करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी से ‘ख़मतख़ामना’ (क्षमा याचना) करते हुए आध्यात्मिक मैत्री का संदेश दिया।


सात माह का प्रवास रहा आत्मचिंतन का काल तेरापंथ सभा, भीनासर के मंत्री चैनप्रकाश गोलछा ने साध्वीवृंदों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि पिछले सात महीनों से भीनासर क्षेत्र में धर्म की जो गंगा बही है, उसने श्रावक-श्राविकाओं को आत्मचिंतन और स्वाध्याय का अमूल्य अवसर प्रदान किया है। साध्वीश्री के मार्गदर्शन में समाज ने आध्यात्मिक ऊंचाईयों को छुआ है।
गीतिका के माध्यम से दी मंगल भावना
इस अवसर पर साध्वी करूणाप्रभाजी, भव्यप्रभाजी और प्राचीप्रभाजी ने सुमधुर गीतिका के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में तेरापंथी सभा, महिला मंडल, कन्या मंडल और युवक परिषद के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में समाजजनों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। सभी ने साध्वीवृंदों के आगामी विहार और यात्रा हेतु मंगल कामनाएं प्रेषित कीं।








