भक्ति और राजस्थानी परंपरा के रंग में रंगा शंकरनाथ जी चौक
भक्ति और राजस्थानी परंपरा के रंग में रंगा शंकरनाथ जी चौक



- नत्थूसर बास में गवरजा महोत्सव की धूम
बीकानेर, 13 मार्च । बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत और गणगौर उत्सव के अनूठे उल्लास का नजारा शुक्रवार को नत्थूसर बास में देखने को मिला। यहाँ शंकरनाथ जी चौक में श्री शंकर नाथ जी चौक मित्र मंडल द्वारा आयोजित भव्य ‘गवरजा महोत्सव’ में परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम हुआ। देर शाम शुरू हुए इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और मंगलमय वातावरण से सराबोर कर दिया।


वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ईशर-गवरजा का पूजन
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्वान पंडितों के सान्निध्य में पूरे विधि-विधान के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ईशर, गणगौर और भाया जी का सामूहिक पूजन किया गया। मंडल की ओर से श्रद्धापूर्वक सभी गणगौर माताओं को श्रीफल (नारियल), प्रसाद और दक्षिणा अर्पित की गई। इस दौरान आयोजन स्थल पर हुई पुष्प वर्षा ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं और बालिकाएं अपनी गणगौर प्रतिमाएं लेकर पहुंचीं, जिससे दृश्य अत्यंत मनोहारी हो गया।


भजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘माँ गवरजा मण्डली’ के कलाकारों द्वारा दी गई भजनों की प्रस्तुतियां रहीं। कलाकारों ने पारंपरिक गणगौर गीतों से उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। इसके अलावा:
नन्हीं बालिकाओं का नृत्य: छोटी बच्चियों ने गणगौर गीतों पर सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया।
सामूहिक गीत: उपस्थित मातृशक्ति ने भी पारंपरिक लोक गीतों के माध्यम से गवरजा माता के प्रति अपनी अगाध आस्था व्यक्त की।
प्रतिभाओं का सम्मान और युवाओं को प्रोत्साहन
आयोजन के दौरान एक विशेष सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इसमें पधारे हुए विशिष्ट अतिथियों का साफा पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। साथ ही, क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवक-युवतियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी गौरवशाली संस्कृति से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को उचित मंच प्रदान करना है।
हर्षोल्लास के साथ समापन
देर रात महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ इस भव्य महोत्सव का समापन हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री शंकर नाथ जी चौक मित्र मंडल के कार्यकर्ताओं और नत्थूसर बास के स्थानीय निवासियों का विशेष सहयोग रहा। बीकानेर की लोक संस्कृति को जीवंत रखने वाले इस आयोजन की क्षेत्र भर में चर्चा रही।
