बज्जू में ‘श्रीअन्न प्रहरि मेला’ संपन्न, मोटे अनाज से महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि पर दिया जोर
बज्जू में 'श्रीअन्न प्रहरि मेला' संपन्न, मोटे अनाज से महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि पर दिया जोर


बीकानेर, 18 मार्च । सीमावर्ती क्षेत्र बज्जू स्थित उरमूल सीमांत समिति के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘श्रीअन्न प्रहरि मेला’ बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस मेले का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को मोटे अनाज (मिलेट्स) के उत्पादन, पोषण संबंधी महत्व और मूल्य संवर्धन (Value Addition) के प्रति जागरूक करना था।


महिलाओं के लिए आय का सशक्त माध्यम है श्रीअन्न
मेले के दूसरे दिन तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए SKRAU की सहायक प्रोफेसर डॉ. ममता सिंह ने प्रतिभागियों को बाजरा और अन्य मोटे अनाजों से तैयार किए जा सकने वाले विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि श्रीअन्न आधारित प्रसंस्कृत उत्पाद (Processed Products) ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक स्वावलंबन और आय वृद्धि का एक बेहतरीन जरिया बन सकते हैं।


परंपरा और तकनीक का संगम
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। बज्जू सरपंच मोहनलाल गोदारा ने श्रीअन्न को टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) का आधार बताते हुए इसे अपनी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बताया। पशु चिकित्सालय प्रभारी डॉ. सुमन नागपाल ने कृषि और पशुपालन के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को पशु बीमा योजनाओं के प्रति जागरूक किया।
SBI उप प्रबंधक गिरधारीलाल हटीला ने मिलेट्स आधारित स्टार्टअप्स और कृषि कार्यों के लिए बैंक द्वारा प्रदान किए जाने वाले वित्तीय सहयोग और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
प्रगतिशील किसानों के अनुभव और सांस्कृतिक छटा
मेले में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों—दुर्गाराम मेघवाल (केलावा), रामकुमार देलू (रावला), हुकमाराम मेघवाल (कोलू) और पीराराम मेघवाल (भेलू)—ने मोटे अनाज की खेती में अपने सफल अनुभवों को साझा कर अन्य किसानों को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के दौरान गावणियार टीम ने लोकगीतों और कठपुतली नाटक के माध्यम से श्रीअन्न के महत्व को मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत किया। अंत में अशोक भाटी ने सफल आयोजन के लिए सभी आगंतुकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
