बीकानेर में विद्यार्थियों ने सीखे बीज उत्पादन और विपणन के गुर
बीकानेर में विद्यार्थियों ने सीखे बीज उत्पादन और विपणन के गुर


- कृषि में उद्यमिता की नई राह
बीकानेर, 20 फरवरी। भविष्य के कृषि वैज्ञानिकों और युवाओं को स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। राष्ट्रीय बीज परियोजना इकाई द्वारा “बीज क्षेत्र में कृषि विद्यार्थियों के लिए उद्यमिता के अवसर” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को बीज उत्पादन की बारीकियों से लेकर इसके व्यावसायिक मॉडल तक की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि प्रमाणित बीज उत्पादन केवल खेती का हिस्सा नहीं, बल्कि एक मुनाफे वाला स्टार्टअप विचार भी हो सकता है।


उन्नत तकनीक और काचरी बीज उत्पादन पर विशेष जोर
प्रशिक्षण के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने शुष्क क्षेत्रों की फसलों और तकनीकी प्रबंधन पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया:


काचरी बीज उत्पादन: डॉ. जे. के. तिवारी ने शुष्क क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण ‘काचरी’ के बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यह फसल कम पानी में किसानों और युवा उद्यमियों के लिए आय का एक सशक्त स्रोत बन सकती है।
तकनीकी दक्षता: निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने प्रमाणित बीज व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक तकनीकी बारीकियों को सीखने के लिए प्रेरित किया।
आधुनिक मशीनरी: इंजीनियर विपिन लड्ढा ने बीज प्रसंस्करण (Processing) यंत्रों और आधुनिक कृषि उपकरणों के बारे में जानकारी देते हुए लागत कम करने के उपाय बताए।
गुणवत्ता और प्रमाणन: सफलता की कुंजी
प्रशिक्षण के दौरान बीज की शुद्धता और सरकारी मानकों को पूरा करने पर विस्तृत चर्चा हुई:
गुणवत्ता परीक्षण: डॉ. सुजीत कुमार ने रोगमुक्त बीज उत्पादन और बीज प्रमाणन की सरकारी प्रक्रियाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया।
क्षेत्रीय विशेषता: डॉ. दाता राम ने ‘भू-सदृश्यता’ (Soil Compatibility) के महत्व को समझाते हुए बताया कि मिट्टी की विशेषताओं के अनुरूप बीज का चयन उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाता है।
व्यवहारिक प्रशिक्षण: शिविर संयोजक डॉ. ए. के. शर्मा ने फसल चयन, पृथक्करण दूरी (Isolation Distance) और भंडारण प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर व्यवहारिक जानकारी साझा की।
प्रमाण पत्र वितरण और भविष्य की राह
समापन सत्र में निदेशक छात्र कल्याण डॉ. एच. एल. देशवाल ने कहा कि युवा विद्यार्थी उन्नत बीज और आधुनिक तकनीक के समन्वय से स्वरोजगार के नए मार्ग खोल सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। अशोक कुमार सोनी ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
