नगर सेठ लक्ष्मीनाथ जी के दरबार से नवसंवत्सर 2083 का शंखनाद
नगर सेठ लक्ष्मीनाथ जी के दरबार से नवसंवत्सर 2083 का शंखनाद


- 151 मंदिरों में गूँजे सनातन के जयकारे
बीकानेर, 19 मार्च । भारतीय संस्कृति एवं सनातन सार्वभौम महासभा तथा श्री विप्र महासभा के तत्वावधान में आज ‘नवसंवत्सर 2083’ के स्वागत हेतु 151 मंदिरों में भव्य पखवाड़ा महोत्सव अनुष्ठान का विधिवत शुभारंभ हुआ। बीकानेर के आराध्य देव नगर सेठ श्री लक्ष्मीनाथ जी मंदिर में विशेष पूजन, भोग और रंगोली उत्सव के साथ इस 43वें वार्षिक अनुष्ठान की शुरुआत की गई।


परंपरागत विधि से हुआ ‘मिश्री-नीम-तुलसी’ का भोग अर्पण
महासभा के अध्यक्ष और राष्ट्रीय संयोजक पंडित योगेन्द्र कुमार दाधीच की अगुवाई में गीता मंदिर से सजी-धजी थालियाँ रवाना हुईं। इन थालियों में परंपरागत रूप से मिश्री, नीम की कोपलें, तुलसी और पुष्प मालाएं सजाई गई थीं। सनातन के जयकारों के साथ यह जत्था नगर सेठ के दरबार पहुँचा, जहाँ मुख्य पुजारी मुन्ना पुजारी, बुलाकी सेवग और अन्य सेवादारों ने भोग स्वीकार कर भगवान को अर्पित किया।


रंगोली और रक्षा सूत्र से सजे देवालय
महोत्सव के पहले दिन मंदिर परिसर में गुलाल और पुष्पों से ‘नवसंवत्सर स्वागतम्’ की आकर्षक रंगोली सजाई गई। दर्शनार्थियों को त्रिवेणी मिश्रित जल और कुमकुम का तिलक लगाकर कलाई पर रक्षा सूत्र (मौली) बांधा गया। अभिमंत्रित तस्वीरों के साथ प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे पाकर भक्त निहाल हो गए। शहर के विभिन्न चौराहों, पार्कों और विद्यालयों में भी इसी क्रम में रंगोली सजाने का कार्य शुरू किया गया है।
1008 कन्याओं का होगा विशेष पूजन
पखवाड़ा महोत्सव के अंतर्गत आगामी दिनों में सेवा और संस्कार के विविध कार्यक्रम होंगे।
कन्या पूजन: नवरात्रि के नौ दिनों तक लगातार कन्या पूजन और कन्या सुरक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
दुर्गा अष्टमी (26 मार्च): नागणेशी जी मंदिर (पवनपुरी) में मुख्य अनुष्ठान होगा, जहाँ 1008 कन्याओं का सामूहिक पूजन कर उन्हें लापसी का भोग और माताजी की तस्वीर भेंट की जाएगी।
रामनवमी (27 मार्च): लक्ष्मीनाथ जी स्थित चामुंडा माता मंदिर में विद्यार्थियों के लिए विशेष अनुष्ठान होगा। यहाँ पूजित पाटी, पोथी, कलम और सरस्वती माता की तस्वीर नौनिहालों को वितरित की जाएगी।
पूर्णिमा तक जारी रहेंगे उत्सव
पंडित योगेन्द्र कुमार दाधीच ने बताया कि यह पखवाड़ा महोत्सव चैत्र मास की पूर्णिमा (2 अप्रैल 2026) तक अनवरत जारी रहेगा। आयोजन को सफल बनाने के लिए एक विस्तृत समिति का गठन किया गया है, जिसमें केशव प्रसाद बिस्सा, दीपक आसोपा, महेश पारीक, नवल कल्ला और अन्य गणमान्य नागरिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
