वैश्विक ‘एपस्टीन फाइल’ का रहस्य और मध्य प्रदेश में लापता बच्चियों का चौंकाने वाला आंकड़ा
वैश्विक 'एपस्टीन फाइल' का रहस्य और मध्य प्रदेश में लापता बच्चियों का चौंकाने वाला आंकड़ा


नई दिल्ली/भोपाल, 20 फरवरी। हाल ही में जारी हुए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय दस्तावेजों ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ जहाँ अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी ‘एपस्टीन फाइल्स’ के नए ट्रेंच ने दुनिया के रसूखदार लोगों के काले कारनामों को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर भारत के हृदय प्रदेश मध्य प्रदेश से लाखों महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के आंकड़ों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एपस्टीन फाइल्स की कहानी केवल ‘न्याय के इनकार’ की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है. यह बताती है कि जब शक्ति और पैसा बिना किसी जवाबदेही के एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं, तो मानवता का सबसे वीभत्स रूप सामने आता है. उन पीड़ितों को न्याय दिलाना अब केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि वैश्विक नैतिकता की परीक्षा है।


जेफरी एपस्टीन… एक ऐसा नाम जो आधुनिक इतिहास में फ्लैटरी, घमंड, लालच और क्रूरता का सबसे घिनौना चेहरा बनकर उभरा है. 30 जनवरी को अमेरिकी जूडिशियल डिपार्टमेंट की ओर से जारी की गई 30 लाख से अधिक पन्नों की फाइलों ने एक ऐसे भ्रष्ट तंत्र का खुलासा किया है, जहां रसूखदार लोगों ने कानून को अपनी जेब में रखा और दर्जनों मासूम लड़कियों के भविष्य को रौंद डाला. हाल ही में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों द्वारा इन फाइलों को पढ़ने लायक बनाने के बाद The Economist ने इस आर्काइव का गहरा विश्लेषण किया, तो पता चला कि यह केवल एक अपराधी की कहानी नहीं है, बल्कि उस अमीर और रसूखदार लोगों की कहानी है जो खुद को कानून से ऊपर समझते था.


2019 में मैनहट्टन की जेल में जेफरी एपस्टीन की रहस्यमयी मौत के बाद पूरी दुनिया में आक्रोश था. लोगों और अमेरिकी कांग्रेस के भारी दबाव के बाद न्याय विभाग ने जो दस्तावेज जारी किए, वे इतने विशाल थे कि उन्हें पढ़ना लगभग असंभव था. लेकिन अब तकनीक की मदद से जो सच सामने आ रहा है, वह किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है.
दुनिया में ‘एपस्टीन फाइल्स’ का नया धमाका: 6 लाख से अधिक दस्तावेज
सार्वजनिक अमेरिका के दिवंगत अरबपति और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों का एक नया और विशाल जत्था (ट्रेंच) 30 जनवरी 2026 को जारी किया गया है।दस्तावेजों का अंबार: अमेरिकी न्याय विभाग ने लगभग 30 लाख पन्नों, हजारों वीडियो और तस्वीरों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू की है। अब तक 6 लाख से अधिक दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं।
फाइलों से पता चलता है कि ताकतवर लोगों ने हजारों कमजोर महिलाओं और लड़कियों की तस्करी की और उनका शोषण किया. यह सिलसिला सालों तक चलता रहा क्योंकि एपस्टीन केवल एक फाइनेंसर नहीं था, बल्कि वह रईसों के लिए ‘फिक्सर’ का काम भी करता था.
हम जिस दुनिया में रहते हैं, उसे मेरिटोक्रेसी कहा जाता है, जहां माना जाता है कि बुद्धिमान और सफल लोग समाज का मार्गदर्शन करेंगे. लेकिन एपस्टीन फाइल्स ने इस भ्रम को चकनाचूर कर दिया है. दुनिया के कई बेहतरीन और प्रतिभाशाली लोग चापलूसी और वासना के जाल में फंसे हुए थे. एपस्टीन के जीवन और मौत ने इस विचार को बल दिया है कि दुनिया का पूरा कुलीन वर्ग अंदर से सड़ चुका है.
रसूखदारों के नाम: इन फाइलों में ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों के करीबियों और कई वैश्विक बिजनेस लीडर्स के नाम शामिल हैं।
भारत का जिक्र: हालिया खुलासे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2017 के इजरायल दौरे और 2019 के चुनावों को लेकर एपस्टीन के ईमेल में कुछ “अपुष्ट और भ्रामक” दावे मिले हैं, जिन्हें भारत सरकार ने ‘बकवास और फर्जी’ बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन खुद को भारत-अमेरिका संबंधों के बीच एक ‘बिचौलिये’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा था।
‘सिस्टम’ ने कैसे किया अपराधी का बचाव?
इन दस्तावेजों का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह है जहां न्याय मिलने की प्रक्रिया को जानबूझकर रोका गया. एपस्टीन के पास दुनिया के सबसे ताकतवर राजनेताओं, वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों की पहुंच थी. फाइलों में ऐसे सबूत मिलते हैं जहाँ उच्च पदों पर बैठे लोगों ने एपस्टीन के खिलाफ जांच को कमजोर करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया. जो लोग सार्वजनिक मंचों पर नैतिकता और मानवाधिकारों की बात करते थे, वे बंद दरवाजों के पीछे एपस्टीन के ‘द्वीप’ पर मौजूद थे.
न्याय अब भी अधूरा
एपस्टीन की जेल में मौत ने कई राज उसी के साथ दफन कर दिए, लेकिन फाइलों के सार्वजनिक होने से उम्मीद की एक किरण जगी है. जिन महिलाओं और लड़कियों का शोषण हुआ, उन्हें केवल एपस्टीन की मौत से सुकून नहीं मिलेगा; उन्हें उस पूरे ‘नेटवर्क’ के खिलाफ कार्रवाई चाहिए जिसने एपस्टीन को फलने-फूलने दिया. यह आर्काइव केवल एपस्टीन के बारे में नहीं है, बल्कि उन सभी शक्तिशाली लोगों के बारे में है जिन्होंने या तो इसमें हिस्सा लिया या चुप रहकर इसे अपनी सहमति दी.
आगे क्या?
सॉफ्टवेयर इंजीनियरों द्वारा डेटा को व्यवस्थित करने के बाद अब दुनिया भर के खोजी पत्रकार और वकील इन 30 लाख पन्नों को खंगाल रहे हैं. आने वाले हफ्तों में कई बड़े नामों के बेनकाब होने की संभावना है. एपस्टीन फाइल्स की कहानी केवल ‘न्याय के इनकार’ की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है. यह बताती है कि जब शक्ति और पैसा बिना किसी जवाबदेही के एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं, तो मानवता का सबसे वीभत्स रूप सामने आता है. उन पीड़ितों को न्याय दिलाना अब केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि वैश्विक नैतिकता की परीक्षा है.
मध्य प्रदेश का ‘काला सच’ 6 साल में 2.70 लाख से ज्यादा लापता इधर भारत में,
मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के सवाल के जवाब में गृह विभाग ने जो आंकड़े रखे हैं, वे किसी भी सभ्य समाज के लिए चेतावनी हैं।
विवरण सांख्यिकीय आंकड़े
- 2020 – जनवरी 2026 कुल लापता महिलाएं व बच्चियां2,70,000+ (ढाई लाख से अधिक)
- दैनिक औसत प्रतिदिन लगभग 43 महिलाएं/बच्चियां गायब
- अब तक अनट्रेस (पता नहीं चला)50,000 से अधिक लड़कियां अभी भी लापता हैं.
- हाईकोर्ट की टिप्पणी”10 साल से गायब बच्चियों का सुराग न मिलना पुलिस की विफलता है।”
‘ऑपरेशन मुस्कान’ और सुरक्षा पर सवाल
लापता बच्चियों को वापस लाने के लिए सरकार ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ जैसे अभियान चलाए, लेकिन आंकड़ों के अनुसार इनका असर सीमित रहा है।
मानवाधिकार आयोग (NHRC) का नोटिस: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि सीसीटीवी नेटवर्क की कमी और पुलिस की सुस्ती के कारण इतनी बड़ी संख्या में अपहरण और गायब होने के मामले क्यों बढ़ रहे हैं।
तस्करी की आशंका: विशेषज्ञों का मानना है कि इन लापता बच्चियों का एक बड़ा हिस्सा मानव तस्करी (Human Trafficking) और देह व्यापार के दलदल में धकेला जा रहा है।
राजनीतिक घमासान: प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
