खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने विधानसभा में दी जानकारी
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने शुक्रवार को विधानसभा में


राजस्थान में खुलेंगी 841 नई उचित मूल्य दुकानें, – राशन वितरण सुदृढ़ करने की पहल


जयपुर, 19 फरवरी। राजस्थान सरकार प्रदेश के राशन वितरण तंत्र को और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए बड़े स्तर पर नई उचित मूल्य (FPS) दुकानें खोलने की तैयारी कर रही है। गुरुवार को विधानसभा सत्र के दौरान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने प्रश्नकाल में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य में कुल 841 नई दुकानें खोलने की प्रक्रिया वर्तमान में प्रगति पर है। इनमें से 442 दुकानों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 399 दुकानों के लिए आवेदन और समीक्षा का कार्य जारी है। मंत्री गोदारा ने सदन को अवगत कराया कि आमजन को राशन के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े, इसके लिए नियमों में लचीलापन लाते हुए जिला कलेक्टरों को विशेष अधिकार दिए गए हैं।


पिछली सरकार के लक्ष्यों और वर्तमान स्थिति का विश्लेषण
सदन में चर्चा के दौरान मंत्री गोदारा ने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल की तुलना में वर्तमान प्रगति का ब्योरा पेश किया:
तुलनात्मक आंकड़े: पूर्ववर्ती सरकार ने बजट 2022-23 में 5000 दुकानें खोलने की घोषणा की थी, लेकिन धरातल पर केवल 531 दुकानें ही खोली जा सकीं। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने अल्प समय में ही 973 दुकानें खोलकर वितरण तंत्र को गति दी है।
चित्तौड़गढ़ पर विशेष ध्यान: चित्तौड़गढ़ जिले में पिछले एक वर्ष में 15 नई दुकानों को स्वीकृति दी गई है। इनमें से बेगूं (5), निम्बाहेड़ा (3), बड़ी सादड़ी (2) और कपासन (5) विधानसभा क्षेत्रों में आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। बेगूं में साक्षात्कार का चरण भी पूरा हो चुका है।
नियमों में शिथिलता: अब विधायक की अनुशंसा पर भी खुलेगी दुकान
विधायक चन्द्रभान सिंह चौहान के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री गोदारा ने नियमों की स्पष्टता की:
मानक नियम: सामान्यतः 500 राशन कार्ड और 2000 यूनिट पर एक दुकान खोलने का प्रावधान है।
जनहित में बदलाव: राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों को अधिकार दिया है कि वे आवश्यकतानुसार इन नियमों में शिथिलता (Relaxation) देकर नई दुकानें खोल सकें।
विधायकों की भूमिका: मंत्री ने घोषणा की कि यदि संबंधित क्षेत्र का विधायक जनसुविधा के लिए नई दुकान की मांग करता है, तो सरकार तत्परता से कार्रवाई करेगी। चित्तौड़गढ़ के ‘कच्ची बस्ती भीलों की झोपड़ी’ (वार्ड 34) के लिए ऐसा ही प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।
वक्फ संपत्तियों पर एक्शन: बाड़ी के सैपऊ में अतिक्रमण पर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, मंत्री सुमित गोदारा ने विधानसभा में दी जानकारी
जयपुर, 19 फरवरी। राजस्थान के धौलपुर जिले के बाड़ी विधानसभा क्षेत्र में वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे की शिकायतों को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को विधानसभा सत्र के दौरान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने वक्फ मंत्री की ओर से जवाब देते हुए बताया कि सैपऊ तहसील में वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है और वहां चल रहे अवैध निर्माण कार्य को तुरंत रुकवा दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन और वक्फ ट्रिब्यूनल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी प्रकार के अतिक्रमण पर नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
बाड़ी विधानसभा: 326 संपत्तियां दर्ज, 25 पर अतिक्रमण का साया
मंत्री सुमित गोदारा ने सदन में बाड़ी विधानसभा क्षेत्र की वक्फ संपत्तियों का विस्तृत ब्योरा पेश किया:
संपत्तियों का विवरण: बाड़ी और सैपऊ तहसील में कुल 326 वक्फ संपत्तियां पंजीकृत हैं। इनमें से बाड़ी की 250 और सैपऊ की 65 संपत्तियां राजस्थान राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित हैं।
अतिक्रमण की स्थिति: जांच में सामने आया है कि कुल संपत्तियों में से 25 वक्फ संपत्तियों पर वर्तमान में अतिक्रमण है।
कानूनी लड़ाई: इन संपत्तियों से जुड़े विवादों के संबंध में 74 प्रकरण वर्तमान में राजस्थान उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं।
‘उम्मीद’ पोर्टल से होगा विवादों का निपटारा
प्रश्नकाल के दौरान विधायक जसवंत सिंह गुर्जर द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और विवादों के पारदर्शी समाधान के लिए केंद्र सरकार द्वारा ‘उम्मीद’ (UMMEED) पोर्टल प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से संपत्तियों का रिकॉर्ड डिजिटल हो रहा है, जिससे भविष्य में अतिक्रमण की संभावनाओं को कम किया जा सके।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वक्फ बोर्ड अपनी आय का सृजन संपत्तियों को किराए पर देकर और आमजन के सहयोग से करता है, जिसका उपयोग जन कल्याणकारी कार्यों में किया जाता है।
प्रशासनिक रिपोर्ट सदन के पटल पर
मंत्री ने तहसील बाड़ी और सैपऊ की वक्फ संपत्तियों के वर्तमान उपयोग और उन पर हुए अतिक्रमण की विस्तृत सूची सदन के पटल पर रखी। उन्होंने बताया कि राजपत्र में प्रकाशन के बाद बाड़ी में 10 और सैपऊ में 01 नई (जदीद) वक्फ संपत्तियां दर्ज की गई हैं। सरकार ने आश्वासन दिया कि लंबित कोर्ट केसों में प्रभावी पैरवी कर वक्फ की जमीनों को कब्जामुक्त कराने के प्रयास जारी रहेंगे।
जालोर में राशन दुकानों का आवंटन पूरी तरह पारदर्शी: खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने विधानसभा में दी नियमों की जानकारी
जयपुर, 19 फरवरी। राजस्थान के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने गुरुवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि जालोर जिले सहित प्रदेश भर में उचित मूल्य (राशन) दुकानों का आवंटन पूरी तरह से निर्धारित विभागीय दिशा-निर्देशों और नियमों के अधीन किया जा रहा है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि आवंटन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर विसंगति पाए जाने या आपत्ति दर्ज होने पर जिला स्तर से प्राप्त प्रस्तावों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायक छगन सिंह राजपुरोहित द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए मंत्री ने जालोर जिले और विशेष रूप से आहोर क्षेत्र के आवंटन का विस्तृत ब्योरा पेश किया।
आहोर विधानसभा: आरक्षण और प्राथमिकता का पालन
मंत्री गोदारा ने बताया कि आहोर विधानसभा क्षेत्र में कुल 12 उचित मूल्य की दुकानें स्वीकृत की गई हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:
आवंटन स्थिति: कुल 12 में से 10 दुकानों के लिए विज्ञप्ति जारी हो चुकी है। शेष 2 दुकानों में से एक पर न्यायालय का स्थगन (स्टे) आदेश है, जबकि दूसरी के लिए कोई योग्य आवेदन प्राप्त नहीं हुआ।
आरक्षण श्रेणी: नियमों का पालन करते हुए दिव्यांग श्रेणी को 3, ग्राम सेवा सहकारी समिति को 2 और महिला स्वयं सहायता समूह को 1 दुकान का आवंटन किया गया है।
जालोर का कुल गणित: जिले में कुल 92 दुकानें हैं, जिनमें से 23 नवसृजित (नई) हैं। इनके लिए विभाग को कुल 208 आवेदन प्राप्त हुए थे।
चयन प्रक्रिया: कैसे चुनी जाती है उचित दुकान?
मंत्री ने सदन के पटल पर वर्ष 2016, 2020 और 2022 के विभागीय निर्देशों का विवरण रखते हुए चयन की वरीयता स्पष्ट की:
प्रथम वरीयता (संस्थागत): सबसे पहले सहकारी समितियों और समूहों जैसे संस्थागत आवेदकों को प्राथमिकता दी जाती है।
द्वितीय वरीयता (व्यक्तिगत): यदि संस्थागत श्रेणी में कोई आवेदन नहीं मिलता, तब व्यक्तिगत आवेदकों पर विचार किया जाता है।
बहुमत का निर्णय: एक ही श्रेणी में एक से अधिक पात्र आवेदन होने पर ‘तहसील स्तरीय आवंटन सलाहकार समिति’ बहुमत के आधार पर चयन करती है।
विवाद की स्थिति में अंतिम निर्णय
श्री गोदारा ने पारदर्शिता पर जोर देते हुए बताया कि आवंटन सलाहकार समिति में राज्य सरकार द्वारा मनोनीत गैर-सरकारी सदस्य भी शामिल होते हैं, जो अपनी अनुशंसा जिला कलेक्टर को भेजते हैं।
कलेक्टर की भूमिका: जिला कलेक्टर का निर्णय चयन प्रक्रिया में अंतिम होता है।
राज्य सरकार का हस्तक्षेप: यदि किसी आवंटन को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न होता है, तो प्रकरण राज्य सरकार को भेजा जाता है, जहाँ सरकार द्वारा लिया गया निर्णय ही सर्वोपरि और अंतिम माना जाता है।
