बीकानेर में गणधर गौतम रास का वांचन और महावीर निर्वाण दिवस का आयोजन

बीकानेर में गणधर गौतम रास का वांचन और महावीर निर्वाण दिवस का आयोजन
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर , 21 अक्टूबर। बीकानेर में भगवान महावीर के मोक्ष कल्याणक दिवस के अवसर पर जैन समाज द्वारा कई धार्मिक अनुष्ठान किए गए। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर , मुनि मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, साध्वी दीपमाला व शंखनिधिश्रीजी के सान्निध्य में 21 अक्टूबर (मंगलवार) को रांगड़ी चौक के सुगनजी उपासरे में और श्रावक-श्राविकाओं ने अपने घरों में मंत्र जाप किया। इस दौरान साध्वी शंखनिधि जी के सांसारिक परिवार के सदस्यों का अभिनंदन भी किया गया।

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22 अक्टूबर (बुधवार) को सुगनजी महाराज के उपासरे में सुबह छह बजे गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. के सान्निध्य में भगवान महावीर के प्रमुख गणधर गौतम के रास का वांचन, सप्त स्मरण, भक्तामर तथा शांति स्तोत्र का पाठ होगा। पाठ के समापन के बाद सभी श्रावक-श्राविकाएं डागों के महावीर जी मंदिर में भगवान महावीर के निर्वाण का लड्डू चढ़ाएंगे।

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गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. का प्रवचन

अपने प्रवचन में गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर ने वीर प्रभु महावीर की अंतिम देशना और पुण्यपाल राजा के स्वप्नों का वर्णन किया। उन्होंने ‘जैन’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि आत्म-परमात्म स्वरूप को पहचानने वाला और परमात्मा के शासन की आज्ञाओं का पालन करने वाला ही जैनी कहलाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देव, गुरु व धर्म की आराधना से विमुख होना आत्मिक अनर्थ है। देव पूजा से संसार हरा भरा रहता है, सांसारिक आपत्तियां टलती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने पंच परमेष्ठी (आचार्य, उपाध्याय, साधु) को गुणों पर आधारित बताते हुए सच्चे साधुत्व को परखने और छद्म वेशधारी कुसाधु की संगत से बचने का उपदेश दिया।

छह शताब्दी प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर में पूजा अर्चना

बीकानेर में बड़ा बाजार के घूम चक्कर के पास स्थित छह शताब्दी प्राचीन देवी महालक्ष्मी और भगवान गणेश के मंदिर में सोमवार और मंगलवार को दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। पुजारी गोपाल दाधीच व नरेश मिश्रा ने बताया कि यह मंदिर बीकानेर स्थापना दिवस के पूर्व का है। मंदिर में महालक्ष्मी कमल पर विराजमान हैं और उनकी प्रतिमा के नीचे श्रीयंत्र व त्रिशूल अंकित है, साथ ही चार भुजाधारी भगवान गणेश की प्रतिमा भी है। धनतेरस के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रही, जो मंदिर में बैठकर महालक्ष्मी के स्तोत्र, भगवान गणेश के स्तोत्र व मंत्र जाप आदि कर रहे हैं।

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