हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के 4 पूर्व सरपंच 5 साल के लिए अयोग्य घोषित

बीकानेर में बीएनएस की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश दो माह के लिए बढ़े, जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किए निर्देश
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  • भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार

बीकानेर, 12 मार्च । राजस्थान पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने की दिशा में प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों में घिरे हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों के चार पूर्व सरपंचों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गई है। संभागीय आयुक्त ने इन सभी को आगामी 5 वर्षों तक किसी भी पंचायती राज संस्था का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य (डिबारे) घोषित कर दिया है।

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इन पूर्व सरपंचों पर गिरी गाज
संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन जनप्रतिनिधियों को चुनाव लड़ने से रोका गया है, उनके नाम और पंचायतें इस प्रकार हैं। नौरंग चंद चांवरिया: पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत फतेहगढ़ (हनुमानगढ़)। डिंपल: पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत पीर कामडिया, पंचायत समिति टिब्बी (हनुमानगढ़)। सुमन: पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत डबलीकलां, पंचायत समिति टिब्बी (हनुमानगढ़)। संतोष देवी: पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत 61 एफ, पंचायत समिति श्रीकरणपुर (श्रीगंगानगर)।

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क्यों हुई कार्रवाई?
यह कार्रवाई राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 38(3) के तहत की गई है। जांच के दौरान इन पूर्व सरपंचों के कार्यकाल में भारी वित्तीय अनियमितताएं और सरकारी धन के दुरुपयोग के प्रमाण पाए गए थे। नियमानुसार, धारा 38 के तहत दोषी पाए जाने वाले जनप्रतिनिधि को निर्णय की तिथि से अगले 5 वर्षों तक चुनाव लड़ने की पात्रता नहीं रहती है।

भविष्य के लिए सख्त संदेश
संभागीय आयुक्त के इस आदेश से क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों में भी हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी बजट के प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस निर्णय के बाद अब ये पूर्व सरपंच वर्ष 2031 तक होने वाले किसी भी पंचायती राज चुनाव में अपनी दावेदारी पेश नहीं कर सकेंगे।

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