कर्नाटक कांग्रेस में “इडली-सांभर डिप्लोमेसी” पूरी तरह कामयाब, पार्टी के अंदर चल रही खींचतान पर ब्रेक लगता नजर आ रहा है


कर्नाटक , 29 नवम्बर। कर्नाटक में कांग्रेस के अंदर चल रहे मुख्यमंत्री पद के विवाद को लेकर आज एक बड़ा और सकारात्मक घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कांग्रेस आलाकमान के सख्त निर्देश पर बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास “कावेरी” में सुबह नाश्ते पर मुलाकात की। दोनों नेताओं ने एक-साथ इडली-सांभर का नाश्ता किया।
नाश्ते के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पूरी एकजुटता का संदेश दिया। सिद्धारमैया ने कहा कि नाश्ता बहुत अच्छा था, हमने कोई राजनीतिक चर्चा नहीं की, सिर्फ नाश्ता किया। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं हैं, न पहले थे, न आगे होंगे। हम आलाकमान का हर फैसला मानेंगे। कल से कोई भ्रम नहीं रहेगा, कुछ मीडिया वालों ने अफवाह फैलाई थी।
उन्होंने आगे कहा कि हमारा पूरा फोकस 2028 के विधानसभा चुनाव पर है। स्थानीय निकाय चुनाव और पार्टी को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है। भाजपा और जेडीएस पर निशाना साधते हुए सिद्धारमैया बोले – उनके पास सिर्फ 78 विधायक हैं, हमारे पास 140 हैं। अविश्वास प्रस्ताव लाना उनकी बौखलाहट और निरर्थक कवायद है।
डी.के. शिवकुमार ने भी पूरी तरह मुख्यमंत्री का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आज बहुत सार्थक चर्चा हुई। हम राज्य की जनता की अपेक्षाएं पूरी करने के लिए एकजुट होकर काम कर रहे हैं। हाईकमान ने जो तय किया है, हम उसी पर चल रहे हैं। गुटबाजी की सारी अटकलों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया।
गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने भी मीडिया की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों नेता पहले भी साथ काम कर रहे हैं और साथ कार्यक्रम कर रहे हैं। हमें कोई बड़ा नेतृत्व परिवर्तन नजर नहीं आ रहा। मीडिया बेवजह हवा बना रहा है।



विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए थे



दरअसल, पिछले कुछ दिनों से डीके शिवकुमार खेमे के कई विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए थे और 2023 के कथित “अढ़ाई-ढाई साल” फॉर्मूले के तहत शिवकुमार को सीएम बनाने की मांग कर रहे थे। आलाकमान ने साफ निर्देश दिया था कि दोनों नेता आपस में बैठकर सारे मतभेद खत्म करें। आज की यह ब्रेकफास्ट मीटिंग उसी निर्देश का परिणाम थी। दोनों नेताओं की यह मुलाकात और साझा बयान पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फिलहाल कर्नाटक कांग्रेस में “इडली-सांभर डिप्लोमेसी” पूरी तरह कामयाब दिख रही है और पार्टी के अंदर चल रही खींचतान पर ब्रेक लगता नजर आ रहा है।








