मिनरल एक्सप्लोरेशन, ऑक्शन और नवाचारों से राजस्थान का माइनिंग सेक्टर लिख रहा प्रगति की नई इबारत

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quicjZaps 15 sept 2025

जयपुर, 12 दिसंबर। राजस्थान सरकार के दो साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य के माइनिंग सेक्टर ने मिनरल एक्सप्लोरेशन, ऑक्शन, नीतियों के सरलीकरण और नवाचारों सहित सभी क्षेत्रों में प्रगति की नई इबारत लिखी है। इन योजनाबद्ध प्रयासों के चलते राजस्थान माइनिंग सेक्टर की ओवरऑल रैंकिंग में देश में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है, और मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी में भी दूसरे पायदान पर है। नई सरकार के कार्यकाल में माइनिंग सेक्टर से रिकॉर्ड 17,778 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया गया है। राजस्थान आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर खनिज ब्लॉकों की नीलामी के लिए प्री-एम्बेडेड 8 ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया आरंभ कर देश का अग्रणी प्रदेश बन गया है। अब राज्य माइनिंग सेक्टर में खनिज खोज के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का उपयोग करने और खनिज डम्प्स तथा टेलिंग्स में स्ट्रेटेजिक व क्रिटिकल मिनरल्स की खोज की दिशा में नवाचार करने जा रहा है।

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नई नीतियां और रिकॉर्ड तोड़ नीलामी
राज्य सरकार ने माइनिंग सेक्टर को अग्रणी बनाने के लिए पहले साल में ही निवेशोन्मुखी और सरलीकृत राजस्थान खनिज नीति-2024, राजस्थान एम.सेण्ड नीति-2024 और राजस्थान सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नीति-2025 जारी की है, जिससे सस्टेनेबल विकास की राह प्रशस्त हुई है। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) में भी सहायता प्रावधान किए गए हैं। प्रदेश में अब तक मेजर मिनरल के 112 ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है, जिनमें से 73 मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी वर्तमान सरकार के दो साल के कार्यकाल में हुई है। इसी तरह, 1209 माइनर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी में भी नया रिकॉर्ड बनाया गया है।

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जीडीपी और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य
नई खनिज नीति के क्रियान्वयन से प्रदेश की जीडीपी में माइनिंग सेक्टर की वर्तमान 3.4 प्रतिशत की भागीदारी को 2029-30 तक 5 प्रतिशत और 2046-47 तक 6-8 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही खनिज क्षेत्र से सालाना राजस्व को एक लाख करोड़ रुपए करने का लक्ष्य है। रोजगार के क्षेत्र में भी वर्तमान 35 लाख लोगों के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अवसरों को बढ़ाकर एक करोड़ तक करने पर जोर दिया गया है। नई नीतियों में सस्टेनेबल माइनिंग, क्रिटिकल मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक दायित्व सहित गुड गवर्नेंस के मूल सिद्धांतों का समावेश किया गया है।
क्रिटिकल मिनरल्स में अग्रणी भूमिका
माइनिंग सेक्टर में नवाचारों के चलते राजस्थान केंद्र सरकार के क्रिटिकल मिनरल मिशन का प्रमुख हिस्सेदार प्रदेश बन गया है। राजस्थान में रेयर अर्थ एलिमेंट (REE), लिथियम, टंगस्टन, नायोबियम, टिन, जिरकोनियम, रुबिडियम, ग्रेफाइट एवं फास्फोराइट जैसे प्रमुख क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के डिपोजिट्स अच्छी मात्रा में मौजूद हैं। भारत सरकार ने इनकी ई-नीलामी की प्रक्रिया भी आरंभ कर दी है। प्रदेश के बाड़मेर के सिवाणा रिंग, जालौर व नागौर में दुर्लभ REE के विशाल भंडार मिले हैं, जबकि हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर बेल्ट में पोटाश और नागौर में टंगस्टन के भण्डार मिले हैं।

पारदर्शिता और सरलीकरण की पहल
राज्य सरकार ने नीलाम खानों को शीघ्र परिचालन में लाने के लिए पोस्ट ऑक्शन फेसिलिटेशन सेल स्थापित कर सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। प्रक्रियाओं के सरलीकरण और बेहतर प्रदर्शन के लिए राजस्थान को कोणार्क में आयोजित समारोह में केंद्र सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया है, और स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में भी राज्य ने दूसरा स्थान हासिल किया है। केंद्र सरकार की स्टार रेटिंग में भी राजस्थान की पाँच खानों को स्थान मिला है। माइनिंग सेक्टर को पेपरलेस बनाने, मोबाइल और इंटरनेट सेवी बनाने की दिशा में काम चल रहा है। ई-रवन्ना, ई-पेमेंट, कॉन्ट्रेक्टर रजिस्ट्रेशन जैसे कई मॉड्यूल पर कार्य शुरू किया गया है। साथ ही, माइनिंग सेक्टर में तुलाई कांटे (वे-ब्रिज) ऑटोमेशन और व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम का कार्य भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया है।
निवेश और ग्राउंड ब्रेकिंग
राइजिंग राजस्थान 2024 के दौरान खनन एवं पेट्रोलियम सेक्टर से संबंधित करीब एक लाख करोड़ रुपए राशि के 303 एमओयू अनुमोदित किए गए, जिनमें से 35 हजार करोड़ रुपए राशि के एमओयू की ग्राउंड ब्रेकिंग भी कराई जा चुकी है। निवेशकों से निरंतर संवाद कायम है और ग्राउंड ब्रेकिंग के प्रयास जारी हैं।

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