मौत का तांडव, 27 सवारियों से भरी जीप खाई में गिरी, तीन की मौत, एक दर्जन घायल

मौत का तांडव, 27 सवारियों से भरी जीप खाई में गिरी
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उदयपुर, 21 जनवरी। राजस्थान के उदयपुर जिले के कोटड़ा थाना क्षेत्र में बुधवार को एक भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बिलवन से कोटड़ा जा रही एक ओवरलोड जीप अनियंत्रित होकर करीब 60 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे के वक्त वाहन में क्षमता से अधिक 27 लोग सवार थे। इस घटना ने एक बार फिर दुर्गम पहाड़ी इलाकों में असुरक्षित सफर और प्रशासनिक अनदेखी को उजागर कर दिया है।

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ब्रेक फेल होने से बेकाबू हुआ वाहन
जानकारी के अनुसार, हादसा तब हुआ जब जीप एक चढ़ाई वाले रास्ते को पार कर रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि चढ़ाई के दौरान अचानक जीप के ब्रेक फेल हो गए। चालक ने वाहन को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन क्षमता से अधिक भार होने के कारण जीप पीछे की ओर लुढ़क गई और सीधा गहरी खाई में जा समाई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया।

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हादसे में इन्होंने गंवाई जान
हादसे की सूचना मिलते ही कोटड़ा पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से घायलों को खाई से बाहर निकाला। हादसे में काबू पिता नरसा गरासिया, रेशमी पति वख्ता गरासिया और सुरेश पिता रोशन गरासिया की मौके पर ही मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल एक दर्जन से अधिक यात्रियों को कोटड़ा अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उदयपुर के एमबी अस्पताल रेफर किया गया है।

परिवहन विभाग और पुलिस पर उठते सवाल
कोटड़ा क्षेत्र एक दुर्गम आदिवासी अंचल है, जहाँ सार्वजनिक परिवहन के साधनों का अभाव है। यहाँ के लोग पूरी तरह निजी जीपों पर निर्भर हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके में 120 से अधिक जीपें चलती हैं, जो खुलेआम ओवरलोड होकर सवारियां ढोती हैं। पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने के कारण चालक बेखौफ होकर जोखिम भरा सफर कराते हैं, जिसका खामियाजा निर्दोष आदिवासियों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।

प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आक्रोश
हादसे के बाद क्षेत्र में शोक के साथ-साथ रोष का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि ओवरलोडिंग के कारण पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन गहरी नींद में सोया है। इस हादसे ने एक बार फिर दुर्गम क्षेत्रों में ‘रोड सेफ्टी’ और परिवहन की लचर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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