गंगाशहर में आध्यात्मिक चेतना के साथ नव वर्ष का आगाज़, मुनिश्री कमलकुमार जी ने दिया अहिंसा का संदेश


बीकानेर (गंगाशहर), 1 जनवरी । श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर की ओर से नव वर्ष के अवसर पर ‘नव वर्ष मंगलमय हो’ शुभकामना कार्यक्रम का भव्य आयोजन तेरापंथ भवन में किया गया। इस आध्यात्मिक समारोह में उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमल कुमार जी स्वामी ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को जीवन दर्शन और संस्कारों का मार्ग दिखाया।


मुनिश्री ने नव वर्ष की मंगलकामना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भगवान महावीर की आगम वाणी को केवल सुनने तक सीमित न रखकर, उसे जीवन और व्यवहार में उतारने की महती आवश्यकता है। उन्होंने अहिंसा की सूक्ष्म व्याख्या करते हुए कहा कि ताकत के बल पर किसी का पोषण करना भी हिंसा की श्रेणी में आता है, जबकि शुद्ध अहिंसा वही है जो किसी को पाप कार्यों से बचने का प्रतिबोध दे। मुनिश्री ने आह्वान किया कि नव वर्ष में हम अपनी अंतरात्मा की चेतना को जगाएं और अहिंसा, संयम, तप तथा जप के माध्यम से जीवन को पुष्ट करें।



पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक सुधार पर जोर
मुनिश्री ने समाज को कुरीतियों से बचने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि परिवार में बुजुर्गों, माता-पिता और महिलाओं का सदैव सम्मान करें और हर मांगलिक कार्य ‘जैन संस्कार विधि’ से ही संपन्न करें। शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची पर प्रहार करते हुए मुनिश्री ने फूलों की होली और पूल पार्टी जैसी पाश्चात्य संस्कृति को बंद करने की प्रेरणा दी, ताकि जीव हत्या और पाप कर्मों के बंधन से बचा जा सके। साथ ही, उन्होंने भोजन की बर्बादी रोकने और मांगलिक अवसरों पर ’21 व्यंजन सीमा अभियान’ का सक्रिय सहयोगी बनने का आह्वान किया।
गीतिका और शुभकामनाओं का दौर
कार्यक्रम के दौरान मुनिश्री कमल कुमार जी स्वामी ने स्वयं द्वारा रचित प्रेरक गीतिका का संगान किया। साथ ही मुनिश्री श्रेयांस कुमार जी ने भी नव वर्ष पर सुमधुर गीतिका प्रस्तुत की। समारोह में सभा अध्यक्ष नवरतन बोथरा, महासभा संरक्षक जैन लूणकरण छाजेड़, महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती प्रेम बोथरा सहित किशन बैद, जतनलाल दूगड़, रोशन नाहटा, पवन छाजेड़, मनीष बाफना और धीरेन्द्र बोथरा ने उपस्थित रहकर नव वर्ष की मंगल भावनाएं व्यक्त कीं।समारोह में जतनलाल संचेती , जगत बैद विजयबैद , पवन छाजेड़ , जयचंदलाल भूरा , हनुमानमल छाजेड़ सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सामयिक करके नववर्ष मनाया।








