शिक्षा निदेशालय मारपीट कांड के चलते 15 कर्मचारी तलब, केंटीन प्रदर्शन और सोशल मीडिया कमेंट पर भी कसेगा शिकंजा

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बीकानेर, 6 जनवरी। बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय में अनुशासनहीनता और मारपीट के मामले में विभागीय जांच ने अब रफ्तार पकड़ ली है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के कड़े रुख के बाद संयुक्त निदेशक जयदीप ने इस प्रकरण से जुड़े 15 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर आज दोपहर 2 बजे तलब किया है। जांच का दायरा केवल मारपीट तक सीमित नहीं है, बल्कि घटना के बाद केंटीन के पास हुए प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर की गई विवादित टिप्पणियों को लेकर भी कड़े सवाल पूछे जाएंगे।

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उल्लेखनीय है कि इस मामले में विभाग की आंतरिक जांच के समानांतर बीछवाल थाना पुलिस भी दर्ज एफआईआर (FIR) के आधार पर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है।

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24 दिसंबर की घटना की विस्तृत पड़ताल
जांच का मुख्य केंद्र 24 दिसंबर 2025 की वह दोपहर है, जब सहायक प्रशासनिक अधिकारी और समाज शिक्षा के अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के बीच तीखी झड़प हुई थी। आरोप है कि दोनों के बीच जमकर गाली-गलौज हुई और मामला मारपीट तक पहुंच गया। संयुक्त निदेशक ने तलब किए गए कर्मचारियों से इस घटना के चश्मदीद गवाह बनने और अपने पास उपलब्ध साक्ष्य या जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

कर्मचारी नेताओं की भूमिका पर भी सवाल
निदेशालय प्रशासन ने घटना के बाद केंटीन के पास हुए विरोध प्रदर्शन को गंभीरता से लिया है। जांच दल उन कर्मचारी नेताओं से भी पूछताछ कर रहा है जिन्होंने ज्ञापन सौंपा था। विभाग का मानना है कि कार्यस्थल पर इस तरह का प्रदर्शन कार्य संस्कृति को प्रभावित करता है। तलब किए गए 15 लोगों में से अधिकांश कर्मचारी संगठनों से जुड़े सक्रिय नेता बताए जा रहे हैं।

इन अधिकारियों व कर्मचारियों को भेजा नोटिस
प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिन प्रमुख चेहरों को नोटिस जारी कर उपस्थित होने को कहा गया है, उनमें शामिल हैं. राजेश गोस्वामी (जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा), जितेंद्र पडिहार (सहायक प्रशासनिक अधिकारी), अनिल कुमार पुरोहित, उमेश आचार्य (अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी), मनीष कुमार रंगा ,राजेश व्यास .

अनुशासनहीनता पर हो सकती है बड़ी गाज
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा निदेशालय इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। यदि आज की पूछताछ में मारपीट या सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार के पुख्ता प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन (Suspension) जैसी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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