जैन साध्वी के बैंक खाते पर साइबर ठगों का ‘डिजिटल डाका’; बिना ओटीपी के उड़ाए ₹24 लाख
साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी,


इंदौर, 23 जनवरी। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया है जिसने बैंकिंग सुरक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ प्रवास कर रही एक दिगंबर जैन साध्वी आर्यिका श्री जयश्री माताजी के बैंक खाते से ठगों ने बड़ी ही चतुराई से 24 लाख रुपये की राशि पार कर दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी ठगी के दौरान साध्वी के मोबाइल पर न तो कोई संदिग्ध लिंक आया और न ही कोई ओटीपी (OTP) साझा किया गया।


6 ट्रांजेक्शन में खाली हुआ खाता
इंदौर के साइबर क्राइम सेल में दर्ज शिकायत के अनुसार, यह पूरी वारदात 21 से 23 दिसंबर 2025 के बीच अंजाम दी गई। साध्वी का बैंक खाता छिंदवाड़ा के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में है, जहाँ समाज द्वारा उनके आहार और विहार की व्यवस्था हेतु दान स्वरूप मिली राशि एफडी (FD) के रूप में जमा थी। ठगों ने मोबाइल बैंकिंग ऐप के जरिए पहले इन एफडी को तुड़वाया और फिर छह अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से पूरी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर ली।


मोबाइल ऑन करते ही चला पता
घटना का खुलासा तब हुआ जब साध्वी के साथ रहने वाली बाल ब्रह्मचारिणी काजल दीदी ने किसी कार्यवश रात में मोबाइल ऑन किया। फोन चालू होते ही एक के बाद एक बैंक से पैसे कटने के मैसेज आने शुरू हो गए। आनन-फानन में जब बैंकिंग ऐप चेक किया गया, तो खाते से 24 लाख रुपये गायब थे। इसके तुरंत बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच और प्रारंभिक सुराग
इंदौर साइबर एसपी सव्यसाची सराफ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) के जरिए लेयरिंग का लग रहा है। पुलिस को संदेह है कि किसी एपीके (APK) फाइल या मैलवेयर के जरिए मोबाइल को हैक किया गया होगा, जिससे ठगों को ओटीपी की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। इस मामले में पुलिस ने जालौर के एक आरोपी को हिरासत में लिया है जिसने फर्जी दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को बेचे थे।
बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल
जैन समाज और स्थानीय नागरिकों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। समाज का कहना है कि यदि बिना किसी मानवीय भूल (ओटीपी शेयरिंग) के बैंक से इतनी बड़ी राशि निकल सकती है, तो आम आदमी की जमा पूंजी कितनी सुरक्षित है? पुलिस अब उन खातों की ‘ट्रेल’ तलाश रही है जहाँ यह पैसा ट्रांसफर किया गया है।
