शिवसेना एक विचारधारा है, इसे खत्म करना नामुमकिन: बालासाहेब ठाकरे के शताब्दी समारोह में गरजे उद्धव ठाकरे

शिवसेना एक विचारधारा है, इसे खत्म करना नामुमकिन
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मुंबई, 24 जनवरी। महाराष्ट्र के हालिया नगर निगम चुनावों में मिली करारी शिकस्त और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) पर तीन दशक पुराने वर्चस्व के खत्म होने के बावजूद, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हार मानने से इनकार कर दिया है। अपने पिता और हिंदुत्व के पुरोधा बालासाहेब ठाकरे के शताब्दी समारोह के अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सीधे चुनौती दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक ‘ज्वाला’ है जिसे सत्ता के दम पर बुझाया नहीं जा सकता।

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“शोषितों के दिल की मशाल है शिवसेना”
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि वह शिवसेना को नष्ट कर देगी। उन्होंने भावुक और आक्रामक अंदाज में कहा, “शिवसेना धरती के सपूतों की चिंगारी है और शोषितों के दिलों में जलती हुई मशाल है। आप इसे बिल्कुल नहीं बुझा सकते। यह एक ऐसी विचारधारा है जो महाराष्ट्र के रग-रग में बसी है।” ठाकरे का यह बयान उस समय आया है जब भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने बीएमसी सहित राज्य के 29 में से 25 नगर निगमों पर कब्जा जमा लिया है।

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बीएमसी चुनाव: सत्ता का महापरिवर्तन
महाराष्ट्र की राजनीति का पावर सेंटर मानी जाने वाली बीएमसी में इस बार बड़ा उलटफेर हुआ है। महायुति गठबंधन ने 227 सदस्यीय बीएमसी में 118 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया, जिससे ठाकरे परिवार का दशकों पुराना राज खत्म हो गया।

भाजपा: 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 29 सीटें जीतकर सत्ता में साझीदार बनी।

शिवसेना (यूबीटी): 65 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में रही।

अन्य: कांग्रेस को 24, एआईएमआईएम को 8 और मनसे को 6 सीटें मिलीं।

आंकड़ों का गणित और विपक्षी एकजुटता
चुनाव परिणामों के विश्लेषण से पता चलता है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को मुंबई में 13.13 प्रतिशत वोट मिले हैं। मनसे के साथ गठबंधन के बावजूद वे महायुति के विजय रथ को रोकने में विफल रहे। हालांकि, एआईएमआईएम ने पूरे राज्य में 114 सीटें जीतकर एक नई चुनौती पेश की है। दूसरी ओर, कांग्रेस का वोट शेयर सिमटकर 4.44 प्रतिशत पर रह गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीएमसी में हार उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन शताब्दी समारोह में उनकी आक्रामकता यह संकेत दे रही है कि वे अब ‘विचारधारा’ के कार्ड पर आगामी विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं।

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