आरएसएस के मजबूत गढ़ में कांग्रेस की जीत से राजनीतिक गलियारों में हलचल
आरएसएस के मजबूत गढ़ में कांग्रेस की जीत से राजनीतिक गलियारों में हलचल

- अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के कोहले को हराकर नागपुर स्नातक निर्वाचन सीट पर शानदार जीत दर्ज की
नागपुर, 29 अक्टूबर। महाराष्ट्र विधान परिषद के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (Graduates Constituency) के चुनाव परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने एक बार फिर शानदार जीत हासिल की है। लंबे समय तक चली मतगणना के बाद वकील और शिक्षाविद वंजारी ने बीजेपी के उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 3,271 मतों के अंतर से शिकस्त दी। यह जीत विपक्षी गठबंधन ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


गौरतलब है कि नागपुर न केवल आरएसएस का मुख्यालय है, बल्कि यह राज्य के दिग्गज नेता देवेंद्र फडणवीस का गृह नगर और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का संसदीय क्षेत्र भी है। ऐसे गढ़ में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर वंजारी ने अपनी मजबूत पैठ साबित कर दी है।



नागपुर में कैसे जीते अभिजीत वंजारी?
कड़े मुकाबले में मात: इस चुनाव में कुल 38 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस के अभिजीत वंजारी और बीजेपी के सुधाकर कोहले के बीच ही रहा। अंततः वंजारी ने 3,271 वोटों से बाजी अपने नाम की।
पिछली जीत और सफर: पेशे से वकील अभिजीत वंजारी ने इससे पहले 2020 में भी महा विकास अघाड़ी के उम्मीदवार के तौर पर यह सीट जीती थी।
समर्थन और रणनीति: जीत के बाद वंजारी ने कहा कि बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत और बड़े नेताओं को मैदान में झोंक दिया था, लेकिन स्थानीय मतदाताओं और 48 सहयोगी संगठनों का भरपूर समर्थन उनके पक्ष में रहा।
तनावपूर्ण माहौल: परिणाम घोषित होने के बाद मानकापुर इंडोर स्टेडियम के बाहर कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
आरएसएस के गढ़ में कांग्रेस की जीत क्यों है अहम?
राजनीतिक रूप से नागपुर को बीजेपी और आरएसएस का अभेद्य किला माना जाता है। ऐसे प्रभावशाली और वीवीआईपी क्षेत्र में—जहां से देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी जैसे कद्दावर नेता आते हैं—कांग्रेस की यह जीत पार्टी का मनोबल बढ़ाने वाली है। इस जीत के साथ कांग्रेस ने विधान परिषद चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत की है।

