गोचर भूमि पर सरकार का बड़ा फैसला, BDA और कलेक्टर के अधिकार सीमित, संतों ने वापस लिया आंदोलन
गोचर भूमि पर सरकार का बड़ा फैसला


बीकानेर, 24 जनवरी। बीकानेर की ऐतिहासिक और पारिस्थितिक विरासत ‘सरेह नत्थानिया गोचर भूमि’ के संरक्षण की मांग को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल सुलझता नजर आ रहा है। राज्य सरकार द्वारा गोचर भूमि के मालिकाना हक और नियंत्रण को लेकर जारी किए गए नए स्पष्टीकरण के बाद, साधु-संतों ने 27 जनवरी को प्रस्तावित अपना बड़ा धरना और आंदोलन स्थगित कर दिया है।


स्पेशल पैराफेरी जोन में रहेगी 5,418 हेक्टेयर भूमि
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी लाल बिश्नोई ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीकानेर की करीब 5,418 हेक्टेयर में फैली विशाल गोचर भूमि अब बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहेगी। सरकार ने इसे ‘स्पेशल पैराफेरी जोन’ के रूप में चिह्नित करने का आदेश जारी किया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब जिला कलेक्टर या स्थानीय निकाय इस भूमि के उपयोग को लेकर कोई भी स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकेंगे।


राज्य सरकार की अनुमति के बिना पत्ता भी नहीं हिलेगा
बिश्नोई ने बताया कि मास्टर प्लान को लेकर मिली अधिकांश आपत्तियां सरेह नत्थानिया गोचर से संबंधित थीं। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार ने तय किया है कि:
- गोचर भूमि का पूर्ण मालिकाना हक राज्य सरकार के पास सुरक्षित रहेगा।
- भविष्य में इस क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण या विकास संबंधी गतिविधि पर पूर्ण रोक रहेगी।
- किसी भी आपात स्थिति में यदि कोई निर्णय लेना अनिवार्य हुआ, तो वह केवल राज्य मंत्रिमंडल (Cabinet) के स्तर पर ही संभव होगा।
आंदोलन स्थगित, बस स्टैंड पर संशय बरकरार
सरकार के इस ठोस आश्वासन के बाद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संत सरजूदास ने धरना स्थगित करने की घोषणा की। हालांकि, गोचर भूमि पर पहले से प्रस्तावित ‘इलेक्ट्रिक बस स्टैंड’ के निर्माण को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। बिहारी लाल बिश्नोई ने इस पर कहा कि जो निर्णय पूर्व में हो चुके हैं, उन पर फिलहाल कोई नया आदेश नहीं आया है, लेकिन भविष्य में नई जमीन के आवंटन पर पूरी तरह लगाम रहेगी।
