सियाराम गुफा मंदिर में गूंजा ‘संगठित हिंदू, सुरक्षित भारत’ का संकल्प; पंच परिवर्तन पर हुआ विशेष मंथन
सियाराम गुफा मंदिर में गूंजा 'संगठित हिंदू


बीकानेर, 25 जनवरी। मार्कण्डेय नगर स्थित प्रताप बस्ती की सियाराम गुफा मंदिर परिसर में रविवार को आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन में आस्था और राष्ट्रवाद का अनूठा संगम देखने को मिला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस सम्मेलन में हिंदू समाज को संगठित करने और ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से सामाजिक उत्थान पर विशेष बल दिया गया।


संगठित हिंदू ही सुरक्षित भारत का आधार: योगी विलास नाथ


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वैद्य मघाराम कॉलोनी स्थित चैननाथ धूणा के अधिष्ठाता योगी विलास नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज बिखरा है, राष्ट्र को नुकसान हुआ है। उन्होंने आह्वान किया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए हिंदू समाज जातिगत भेदों को त्यागकर एकजुट बने। संघ के शताब्दी वर्ष में देश भर में आयोजित हो रहे ये सम्मेलन हिंदुओं में चेतना जागृत करने और सनातन धर्म की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित होंगे।
पंच परिवर्तन: सामाजिक ढांचे को मजबूत करने की पांच प्रतिज्ञाएं
सम्मेलन में वक्ताओं ने ‘पंच परिवर्तन’ के पांच प्रमुख स्तंभों पर विस्तृत व्याख्यान दिए, जिन्हें समाज में लागू करने का संकल्प लिया गया:
सामाजिक समरसता: ऊंच-नीच और छुआछूत का त्याग कर सभी हिंदुओं को एक सूत्र में पिरोना।
पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति की रक्षा को धर्म का हिस्सा बनाना।
कुटुम्ब प्रबोधन: संयुक्त परिवार प्रणाली और पारिवारिक संस्कारों का पुनरुद्धार।
स्व आधारित जीवन: स्वदेशी और भारतीय जीवन मूल्यों को दैनिक चर्या में अपनाना।
नागरिक कर्तव्य बोध: अधिकारों के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों के प्रति सजग रहना।
मुख्य वक्ता दुर्ग सिंह राजपुरोहित (जोधपुर) ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई भी हिंदू नीचा या पतित नहीं है, हम सब एक ही भारत माता की संतान हैं।
काव्य पाठ और हनुमान चालीसा से आध्यात्मिक वातावरण
सम्मेलन का आकर्षण सूरज बालबाड़ी की कक्षा चार की छात्रा आयुषी प्रजापत का जोश भरा काव्य पाठ रहा, जिसने श्रोताओं में देशप्रेम का संचार कर दिया। पंडित पुरुषोत्तम व्यास ‘मीमांशक’ के नेतृत्व में उपस्थित जनसमूह ने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया।
कार्यक्रम में ममता बिश्नोई, शशि शर्मा, ओमजी भादू और दीपक पारीक ने विभिन्न विषयों पर विचार व्यक्त किए, जबकि देवेंद्र स्वामी ने आयोजन की प्रस्तावना रखी।
