सुरों का साधक बीकानेर के प्रख्यात संगीत मनीषी मगन कोचर का निधन, कला जगत में शोक की लहर
प्रख्यात संगीत मनीषी मगन कोचर का निधन, कला जगत में शोक की लहर


बीकानेर, 1 फ़रवरी । राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी बीकानेर के कला जगत के लिए एक अत्यंत दुखद समाचार है। प्रख्यात संगीतज्ञ और सादगी की प्रतिमूर्ति मगन कोचर का 74 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को निधन हो गया है। उनके अवसान से न केवल संगीत जगत ने एक अनमोल सितारा खो दिया है, बल्कि बीकानेर की उस समृद्ध विरासत को भी अपूरणीय क्षति हुई है जिसे उन्होंने अपने स्वरों और संस्कारों से सींचा था। उनके निधन पर जैन महासभा ने ऐसे जैन समाज के लिए अपूर्णीय क्षति बताया। तेरापंथी सभा , गंगाशहर ने भी श्रद्धांजलि व्यक्त कृते हुए उनकी आत्मा की उत्तरोत्तर विकास की कामना की है। उनका अंतिम संस्कार गोगागेट के पास ओसवाल शमशान गृह में किया गया। मगन जी कोचरकी अंतिम यात्रा सैकड़ों लोग शामिल हुए।


मगन कोचर केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि संगीत के एक चलते-फिरते संस्थान थे। वे अपने पीछे शिष्यों की एक लंबी कतार छोड़ गए हैं, जिन्हें उन्होंने केवल रागों और तालों की बारीकियां ही नहीं, बल्कि जीवन के नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा दी। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी विनम्रता थी। वे अक्सर कहा करते थे कि कला का कद जितना ऊंचा हो, कलाकार को उतना ही जमीन से जुड़ा होना चाहिए। यही कारण था कि चाहे वह कोई उभरता हुआ युवा कलाकार हो या कला का पारखी बुजुर्ग, मगन जी हर आयु वर्ग में समान रूप से सम्मानित और प्रिय थे।


अहंकार से कोसों दूर रहने वाले कोचर साहब का जीवन सादगी और आत्मिक समृद्धि का अद्भुत उदाहरण था। उनके निधन पर शहर के गणमान्य नागरिकों, संगीतकारों और कला प्रेमियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। उनके प्रशंसकों का कहना है कि भले ही आज वे शारीरिक रूप से हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा सिखाए गए संस्कार, उनकी मधुर स्मृतियां और उनके संगीत की गूंज आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी। बीकानेर की फिजाओं में उनके संगीत का जादू सदैव जीवंत रहेगा। थार एक्सप्रेस परिवार उनको अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
