हरीश बी. शर्मा के कहानी संग्रह ‘बाजोट’ का लोकार्पण, ‘कहानी का कहन’ में हुआ गंभीर विमर्श
हरीश बी. शर्मा के कहानी संग्रह 'बाजोट' का लोकार्पण


बीकानेर, 15 फ़रवरी । बीकानेर के साहित्यिक पटल पर शनिवार को एक और उपलब्धि जुड़ गई। जिला उद्योग संघ के सभागार में वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं नाटककार हरीश बी. शर्मा के राजस्थानी से हिंदी में अनूदित कहानी संग्रह ‘बाजोट’ का गरिमामय लोकार्पण संपन्न हुआ। इस अवसर पर ‘कहानी का कहन’ परिसंवाद का भी आयोजन किया गया, जिसमें समकालीन कहानियों की दिशा और समाज पर उनके प्रभाव पर गहन विमर्श हुआ।


लोकार्पण समारोह के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि कहानी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने का माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कहानी को किसी खास ‘वाद’ या संकुचित विमर्श में नहीं बांधा जाना चाहिए, क्योंकि वह समाज निर्माण में अपनी भूमिका प्रत्यक्ष रूप से निभाती है। उन्होंने हरीश की कहानियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये रचनाएं अपने समय के यथार्थ को बखूबी प्रतिबिंबित करती हैं।


समाज की चुप्पी तोड़ती कहानियां
स्विट्जरलैंड के गैलन विश्वविद्यालय की मैण्टोर और कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. रश्मि राय रावत ने संग्रह पर अपने विचार रखते हुए कहा कि ‘बाजोट’ की कहानियां उन जरूरी और संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी तोड़ती हैं, जिनसे अक्सर समाज कतराता है। ये कहानियां पाठकों को उन प्रश्नों पर विचार करने के लिए आमंत्रित करती हैं जो आज के दौर में सर्वाधिक प्रासंगिक हैं।
लेखक हरीश बी. शर्मा ने अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा कि एक रचनाकार की जिम्मेदारी उस सच को सामने लाना है जो आवरणों में ढका-छुपा है। उन्होंने पाठकों से अपील की कि पुस्तक खरीदने से अधिक महत्वपूर्ण उसे पढ़ना और अपने भीतर उतारना है। उन्होंने पठन-पाठन की संस्कृति को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया।
सार्थक संवाद: ‘कहानी का कहन’
लोकार्पण के पश्चात आयोजित परिसंवाद में शहर के प्रबुद्ध साहित्यकारों ने ‘बाजोट’ की दस कहानियों के शिल्प और कथ्य पर सार्थक चर्चा की। राजाराम स्वर्णकार, डॉ. रेणुका व्यास, डॉ. गौरीशंकर प्रजापत और इरशाद अज़ीज़ सहित अन्य वक्ताओं ने वर्तमान जीवन में कथा साहित्य की उपयोगिता पर संवाद किया।
कार्यक्रम संयोजक संजय आचार्य वरुण ने कहा कि कहानीकार में वह हुनर होना चाहिए कि वह बिना कहे भी समाज के कड़वे सच को उद्घाटित कर दे, और हरीश इस कला में माहिर हैं। कार्यक्रम के आरंभ में वरिष्ठ पत्रकार धीरेन्द्र आचार्य को पुस्तक की प्रथम प्रति और स्मृति चिन्ह के रूप में ‘बाजोट’ का लघु प्रतिरूप भेंट किया गया।
साहित्यानुरागियों का जुटा हुजूम
पारायण फाउण्डेशन और गायत्री प्रकाशन द्वारा आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम में मालचंद तिवाड़ी, बुलाकी शर्मा, राजेंद्र जोशी और दीपचंद सांखला जैसे वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ-साथ बड़ी संख्या में रंगकर्मी और साहित्यानुरागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में वास्तुविद आर. के. सुतार ने सभी का आभार व्यक्त किया।
