भजनलाल सरकार के दो साल: ‘सुशासन का रिपोर्ट कार्ड’ जारी, भाजपा जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने कहा— बहस से डरकर भागी कांग्रेस
भाजपा जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने कहा— बहस से डरकर भागी कांग्रेस



बीकानेर, 25 फरवरी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली प्रदेश की ‘डबल इंजन’ सरकार ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल का लेखा-जोखा जनता के सामने पेश कर दिया है। भाजपा शहर जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने बुधवार को प्रेस वार्ता के दौरान सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने विधानसभा में स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा निभाते हुए तुलनात्मक बहस की चुनौती दी थी, लेकिन कांग्रेस के सदस्य तथ्यों का सामना करने के बजाय सदन छोड़कर भाग खड़े हुए।


संकल्प पत्र की सफलता: 73% वादे पूरे होने की राह पर
सुमन छाजेड़ ने आंकड़ों के जरिए पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार के कामकाज का अंतर स्पष्ट किया।
संकल्प पत्र 2023: भाजपा के संकल्प पत्र के 392 बिंदुओं में से 285 बिंदुओं (73%) पर कार्य या तो पूर्ण हो चुका है या प्रगति पर है।
बजट घोषणाओं का क्रियान्वयन: पिछले दो वर्षों में की गई 2,719 बजट घोषणाओं में से 90 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं। वर्ष 2024-25 की 45% घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं।
कांग्रेस का पिछला रिकॉर्ड: छाजेड़ ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार की 4,148 घोषणाओं में से 2,208 (53%) कभी पूरी ही नहीं हुईं, जबकि 2023-24 की 80% घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रहीं।
कानून-व्यवस्था: अपराधों में दर्ज की गई भारी गिरावट
कानून-व्यवस्था को सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि भाजपा के राज में अपराधी खौफ में हैं।
महिला अपराध: महिला अपराधों में 10 प्रतिशत की कमी आई है।
जघन्य अपराध: वर्ष 2023 की तुलना में कुल अपराधों में 15% की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषकर हत्या के मामलों में 25% और लूट की घटनाओं में 50% की कमी आई है।


“कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं का किया अपमान”
मीडिया संयोजक कमल गहलोत के अनुसार, सुमन छाजेड़ ने कांग्रेस पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि खराब करने और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल हंगामा करना जानता है, जबकि भाजपा सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र के साथ राजस्थान को सुशासन का मॉडल बना रही है। विधानसभा में जब मुख्यमंत्री जवाब देने खड़े हुए, तब कांग्रेस सदस्यों का सदन से बाहर जाना उनकी वैचारिक हार का प्रतीक है।
