कोर्ट ने दिल्ली आबकारी मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया

कोर्ट ने दिल्ली आबकारी मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया
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quicjZaps 15 sept 2025

कोर्ट ने कहा— “साजिश का कोई सबूत नहीं

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नई दिल्ली, 27 फरवरी । दिल्ली की राजनीति में आज उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित शराब नीति घोटाले (Delhi Liquor Scam Case) में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बड़ी राहत दी। विशेष अदालत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और संजय सिंह समेत कुल 23 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। सीबीआई द्वारा दर्ज इस मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरी नीति के कार्यान्वयन में किसी भी प्रकार की आपराधिक साजिश या भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।

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अदालत का फैसला: “नहीं था कोई आपराधिक इरादा”
विशेष अदालत ने अपने फैसले में अभियोजन पक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि नीति निर्माण एक प्रशासनिक प्रक्रिया थी और इसमें किसी भी आरोपी का कोई “आपराधिक इरादा” (Criminal Intent) साबित नहीं होता है।

बड़ी राहत: मनीष सिसोदिया, जिनके पास उस समय आबकारी विभाग था, के लिए यह फैसला उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।

साजिश के दावों का अंत: कोर्ट ने माना कि जो आरोप लगाए गए थे, वे कानूनी रूप से सिद्ध नहीं हो पाए।

विवाद की जड़: क्या थी नई शराब नीति ?
यह पूरा मामला नवंबर 2021 में लागू की गई नई आबकारी नीति 2020 से शुरू हुआ था। सरकार का तर्क था कि इससे दिल्ली में शराब माफियाओं का खात्मा होगा और राजस्व में वृद्धि होगी। हालांकि, 8 जुलाई 2022 को दिल्ली के मुख्य सचिव ने एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें दावा किया गया कि इस नीति से सरकारी खजाने को 580 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच के आदेश दिए और सरकार ने 30 जुलाई 2022 को इस नीति को वापस ले लिया था।

गिरफ्तारी से रिहाई तक: एक नजर टाइमलाइन पर
इस मामले में ‘आप’ के तीनों बड़े नेताओं को न केवल जेल की हवा खानी पड़ी, बल्कि लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी.

नवंबर 2021
सरकार ने नवंबर 2021 में लागू की नई शराब नीति 2020 में दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति लाने की बात कही थी। मई 2020 में दिल्ली सरकार नई शराब नीति लेकर आई, जिसे 17 नवंबर 2021 से लागू कर दिया गया. उस समय उत्पाद शुल्क विभाग का नेतृत्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया करते थे.

8 जुलाई 2022
दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल कार्यालय और सीएम कार्यालय को एक रिपोर्ट सौंपी. उन्होंने आरोप लगाया कि नीति के कार्यान्वयन में प्रक्रियात्मक खामियां थीं और लाइसेंसधारकों को निविदा के बाद लाभ दिया गया था. रिपोर्ट में कहा कि सरकारी खजाने को 580 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान होने का अनुमान है.

सरकार पर लगे 4 मुख्य नियमों को तोड़ने के आरोप
GNCTD अधिनियम 1991, व्यावसायिक लेन देन नियम (टीओबीआर) 1993, दिल्ली उत्पाद शुल्क अधिनियम 2009,दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम 2010
22 जुलाई 2022
दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली में सरकार की नई उत्पाद शुल्क नीति की CBI जांच के आदेश दिए.

30 जुलाई 2022
दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति वापस लेने का फैसला किया

17 अगस्त 2022
CBI ने केस दर्ज किया

इन प्रमुख AAP नेताओं को किया गया गिरफ्तार फिर मिली जमानत
मनीष सिसोदिया –गिरफ्तार: 26 फरवरी, 2023 – CBI, 9 मार्च 2023- ED ,जमानत: 9 अगस्त 2024

मामला: दिल्ली शराब नीति घोटाला

संजय सिंह- गिरफ्तार: 4 अक्टूबर 2023, जमानत: 2 अप्रैल, 2024

मामला: दिल्ली शराब नीति घोटाला

अरविंद केजरीवाल- गिरफ्तार: 21 मार्च, 2024 , जमानत: 13 सितंबर 2024

इस मामले पर किसने क्या कहा, आइए जानते हैं.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फैसले का स्वागत किया. मान ने कहा, “सत्य की हमेशा जीत होती है. न्याय में देरी हो सकती है लेकिन न्याय से इनकार नहीं किया जा सकता. अरविंद केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य सभी को दिल्ली के तथाकथित शराब घोटाला मामले में माननीय न्यायालय द्वारा झूठे, मनगढ़ंत और झूठ के पुलिंदे से बरी कर दिया गया है, जिससे एक बार फिर साबित हो गया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की एजेंसियों ने आम आदमी पार्टी की ईमानदारी की राजनीति को बदनाम करने और नुकसान पहुंचाने के लिए यह सब किया था.”

दिल्ली शराब घोटाले में बरी होने के बाद परिवार से मिलते अरविंद केजरीवाल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा, “केंद्र सरकार की भाजपा सरकार को अल्पकालिक राजनीति के लिए जांच एजेंसियों की निष्ठा को गिरवी नहीं रखना चाहिए. थोड़ी शर्म तो दिखाओ. शाबाश, मेरे आदरणीय मित्र थिरु @ArvindKejriwal और थिरु @msisodia इन सब के बावजूद दृढ़ रहने और सच्चाई को खुद बोलने देने के लिए.”

समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव ने कहा, “सच्चाई और न्याय मजबूती से केजरीवाल के साथ खड़ा है और कोई भी आरोप सच्चाई पर हावी नहीं हो सकता. आज दिल्ली के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी के साथ सत्य एवं न्याय दोनों खड़े हैं. आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वह सच को आच्छादित कर ले. आज हर ईमानदार आशा भरी सांस लेगा और भाजपा के समर्थकों को शर्मिंदगी महसूस हो रही होगी. भाजपा ने दिल्ली के निवासियों के साथ विश्वासघात किया है.”

राजद सांसद मनोज झा ने कहा, “इस तरह सारे बदले के केस खत्म होंगे. यह बदले के केस की मेरिट पिटीशन थी. इस तरह से एक पॉलिटिकल लड़ाई लड़ी गई. यह एक शुरुआत है. इन दो लोगों की तरह सभी को राहत मिलेगी.”

तेलंगाना जागृति की संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता ने दिल्ली आबकारी नीति “घोटाले” में अदालत द्वारा बरी किए जाने के बाद शुक्रवार को कहा कि “सत्य की जीत होती है.” उन्होंने यह भी दावा किया कि यह मामला उनके खिलाफ “राजनीतिक प्रतिशोध” के तहत “थोपा” गया था. दिल्ली की एक अदालत के फैसले पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पहली प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “सत्यमेव जयते.” बाद में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “न्यायपालिका ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में झूठ के जाल को ध्वस्त कर दिया.”  कविता को इस मामले में मार्च 2024 में गिरफ्तार किया गया था और उसी साल 29 अगस्त को दिल्ली की तिहाड़ जेल से वह रिहा हुई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और धन शोधन मामले में जमानत दे दी थी.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भाजपा को “इच्छाधारी नाग” की संज्ञा दी. उन्होंने कहा कि भाजपा का जुनूनी लक्ष्य कांग्रेस को हराना और “कांग्रेस मुक्त भारत” बनाना है, जिसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है. उन्होंने कहा, “इसमें कोई हैरानी की बात नहीं. यह तो पहले से ही अनुमानित था. भाजपा हर चुनाव से पहले यही करती है. अगर कांग्रेस को कमजोर करना उनके लिए फायदेमंद होता है, तो वे कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वियों को मजबूत करते हैं. अतीत में भी उन्होंने यही किया है. कल उन्होंने पी चिदंबरम के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी, ताकि तमिलनाडु में कांग्रेस को कमजोर किया जा सके. कांग्रेस को कमजोर करने के लिए प्रधानमंत्री ने टीएमसी को मंजूरी तक दे दी. जमीनी हकीकत में कुछ नहीं बदलेगा, गुजरात और पंजाब के लोग बदलाव के लिए तैयार हैं और उनकी नजर कांग्रेस पर है.”

राज्यसभा सांसद और शिवसेना (उद्धव गुट) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा, “झूठ, दुष्प्रचार और जहरीले राजनीतिक एजेंडे के खिलाफ उन्होंने लड़ाई लड़ी और यह सुनिश्चित किया कि सच और न्याय की जीत हो. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को इस दृढ़ता और संघर्ष के लिए बधाई.”

तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि यह मामला “राजनीति से प्रेरित” था और इसका उद्देश्य विपक्षी नेताओं को “बदनाम” करना था. उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया, “भाजपा ने विपक्षी नेताओं को बदनाम करने के लिए एक फर्जी मामला दर्ज कराया, जिसके तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया और उनके मनोबल को तोड़ने तथा उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। एक बार फिर सीबीआई और ईडी को अपने राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की भाजपा की बेशर्म चाल बेनकाब हो गई है। मोदी-शाह सरकार इन फर्जी मामलों की तरह जल्द ही ढह जाएगी.”

भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, “सभी जानते हैं कि ये दोनों (अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया) इस घोटाले के जनक थे. दिल्ली की जनता अच्छे से जानती है कि एक्साइज घोटाले के जनक अरविंद केजरीवाल थे. जिन लोगों को पकड़ा गया है, उनकी भी गवाही होगी. सभी जानते हैं कि ये लोग इस घोटाले के मास्टर माइंड थे.”

मामले में कुल 23 आरोपियों को किया गया बरी. ये हैं उनके नाम.

  1. अरविंद केजरीवाल (दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री),
  2. मनीष सिसोदिया (दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री)
  3. के. कविता (बीआरएस नेता और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी)
  4. विजय नायर (आप के पूर्व संचार प्रभारी)
  5. अभिषेक बोइनपल्ली (व्यापारी)
  6. अरुण रामचंद्र पिल्लई (हैदराबाद के व्यवसायी)
  7. समीर महेंद्रू (इंडोस्पिरिट के प्रबंध निदेशक)
  8. अमनदीप सिंह ढल (व्यापारी, ब्रिंडको सेल्स)
  9. अर्जुन पांडे (विजय नायर के कथित करीबी सहयोगी)
  10. बुच्चीबाबू गोरंटला (के. कविता के पूर्व चार्टर्ड अकाउंटेंट)
  11. राजेश जोशी (चैरियट प्रोडक्शंस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक)
  12. दामोदर प्रसाद शर्मा (आबस्ती अधिकारी)
  13. प्रिंस कुमार (आबस्ती अधिकारी)
  14. अरविंद कुमार सिंह (इंडिया अहेड न्यूज में प्रोडक्शन कंट्रोलर)
  15. चानप्रीत सिंह रायत (आप के कथित फंड मैनेजर)
  16. दुर्गेश पाठक (आप विधायक)
  17. अमित अरोरा (बडी रिटेल के निदेशक)
  18. विनोद चौहान (कथित हवाला संचालक)
  19. आशीष चंद माथुर (व्यापारी)
  20. सरथ चंद्र रेड्डी (अरबिंदो फार्मा के निदेशक)
  21. कुलदीप सिंह (पूर्व आबकारी आयुक्त)
  22. नरेंद्र सिंह (पूर्व उप आबकारी आयुक्त)
  23. मूथा गौतम (इंडिया अहेड न्यूज के प्रबंध निदेशक)

हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है. अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का मानना ​​है कि अपील आवश्यक है क्योंकि जांच के कई पहलुओं को अधीनस्थ अदालत द्वारा या तो “नजरअंदाज किया गया है या उन पर विचार नहीं किया गया है.” सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “सीबीआई ने अधीनस्थ अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में तत्काल अपील करने का फैसला किया है क्योंकि जांच के कई पहलुओं को या तो नजरअंदाज किया गया है या उन पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया है.”

दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें उसी वर्ष 13 सितंबर को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल गयी थी. वह पद पर रहते हुए गिरफ्तार होने वाले दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री थे. पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसोदिया को जमानत पर रिहा होने से पहले लगभग 17 महीने जेल में बिताने पड़े थे.

राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के दफ्तरों के बाहर जश्न का माहौल है। पार्टी ने इसे “सत्य की जीत” बताया है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से आगामी विधानसभा चुनावों में ‘आप’ को बड़ी बढ़त मिल सकती है। विपक्षी दल अब जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

 

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