डाउन सिंड्रोम बच्चों की सबसे बड़ी चिकित्सक उसकी माता: डॉ. श्याम अग्रवाल
डाउन सिंड्रोम बच्चों की सबसे बड़ी चिकित्सक उसकी माता: डॉ. श्याम अग्रवाल


बीकानेर, 21 मार्च 2026 (शनिवार)। ‘विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस’ के उपलक्ष्य में जस्सूसर गेट के बाहर स्थित ग्रोथ गेट चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर में शनिवार को एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान जन्म से शारीरिक और मानसिक रूप से कम विकसित बच्चों के कारणों, उपचार और उनके पालन-पोषण के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने अभिभावकों का मार्गदर्शन किया।


मां ही सबसे बड़ी शिक्षक और पालनकर्ता
मुख्य वक्ता एवं प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल ने भावुक संबोधन में कहा कि डाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों के लिए उनकी माता ही सबसे बड़ी चिकित्सक और शिक्षक होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे बच्चों को ‘परमात्म स्वरूप’ मानकर उनकी देखभाल करनी चाहिए। डॉ. अग्रवाल ने उत्साहवर्धन करते हुए देशनोक के एक बालक का उदाहरण दिया, जो डाउन सिंड्रोम के बावजूद श्रेष्ठ देखभाल और सही उपचार से आज एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बन चुका है।


निशुल्क दंत चिकित्सा शिविर की घोषणा
विशिष्ट अतिथि और दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनम राय ने डाउन सिंड्रोम और हीमोफीलिया से ग्रसित बच्चों में दांतों और जीभ की सफाई के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने घोषणा की कि 28 मार्च को जयनारायण व्यास कॉलोनी स्थित ‘स्माइल केयर डेंटल एवं इंप्लांट सेंटर’ में सुबह 10:30 से दोपहर 2:30 बजे तक निःशुल्क दंत जांच शिविर आयोजित किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने प्रतिमाह एक दिन ग्रोथ गेट सेंटर में इन बच्चों को निशुल्क परामर्श देने का संकल्प भी लिया।
क्या है डाउन सिंड्रोम?
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दयानंद पब्लिक स्कूल की पूर्व प्राचार्य अलका डॉली पाठक ने इसके वैज्ञानिक पक्ष को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया यह गुणसूत्र (Chromosome) की एक अतिरिक्त प्रति (Trisomy 21) के कारण होने वाला विकार है।लक्षण: शारीरिक विकास में देरी, बौद्धिक अक्षमता, चपटा चेहरा, छोटी गर्दन और सीखने-समझने की क्षमता में कमी। समाधान: उन्होंने समाज से अंधविश्वास और भ्रांतियों को दूर कर फिजियोथेरेपिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट की सलाह लेने का आह्वान किया।
विशेषज्ञों ने साझा किए नवीनतम शोध
सेंटर के निदेशक कुशाल कटारा, नितिन शर्मा और स्पीच थेरेपिस्ट देशराज सिंह गुर्जर ने केंद्र में उपलब्ध नवीनतम उपचार तकनीकों और शोध के बारे में अभिभावकों को विस्तार से बताया। कार्यक्रम के अंत में पूजा स्वामी, उषा मुंधड़ा और मोनिका अग्रवाल जैसी माताओं ने अपने बच्चों के विकास और पालन-पोषण के व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जिससे अन्य अभिभावकों को संबल मिला।
