वित्तीय सहायता पाकर खिल उठे धूमावती माताओं के चेहरे
श्री जी धूमावती चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित त्रैमासिक वित्तीय सेवा समारोह



बीकानेर की ‘नर सेवा नारायण सेवा’ परंपरा का अनूठा उदाहरण


बीकानेर, 12 अप्रैल। बीकानेर के धरणीधर महादेव मंदिर परिसर में रविवार को श्री जी धूमावती चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित त्रैमासिक वित्तीय सेवा समारोह में सेवा और समर्पण का भाव साक्षात देखने को मिला। ट्रस्ट द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली और विधवा माताओं को वित्तीय संबल प्रदान किया गया, जिससे उनके चेहरों पर आत्मविश्वास की मुस्कान तैर गई।


प्रशासनिक और औद्योगिक जगत के दिग्गज बने साक्षी
समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी राजकुमार मीणा ने ट्रस्ट के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां लोग स्वयं के परिवार तक सीमित हैं, वहीं यह ट्रस्ट असहाय माताओं को निजी खर्चे वहन करने के लिए आत्मनिर्भर बना रहा है। यह वास्तव में एक प्रशंसनीय और मानवीय कदम है।
करणी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश कोठारी ने बीकानेर को ‘छोटी काशी’ बताते हुए कहा कि यहां का हर व्यक्ति किसी न किसी सेवा प्रकल्प से जुड़ा हुआ है। ट्रस्ट द्वारा माताओं के चेहरे पर लाई गई यह मुस्कान ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ का वास्तविक स्वरूप है।
परमात्मा की सेवा के समान है यह प्रकल्प: मनीष सिपाणी
प्रमुख ऊन व्यवसायी और समाजसेवी मनीष सिपाणी ने इस अवसर पर भावुक होते हुए कहा, “माताओं के चेहरे की यह खुशी साक्षात ईश्वर की मुस्कान के समान है। इस अनूठे प्रकल्प का साक्षी बनना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। ट्रस्ट सीधे परमात्मा को खुश करने का पुण्य कार्य कर रहा है।”
101 माताओं को मिली सहायता
ट्रस्ट के अध्यक्ष द्वारकाप्रसाद पचीसिया ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पंडित घनश्याम आचार्य के मार्गदर्शन में ट्रस्ट द्वारा कुल 101 धूमावती माताओं को 1500 रुपये की त्रैमासिक वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही भामाशाहों के सहयोग से सभी माताओं को मिठाई और नमकीन के पैकेट भी भेंट किए गए।
इस गरिमामय समारोह में रामगोपाल अग्रवाल, अनंतवीर जैन, मोहनलाल चांडक, नरेंद्र जैन, रामस्वरूप जनागल, कश्मीरीलाल मक्कड़ और भंवरलाल चांडक सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और सेवाभावी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने ट्रस्ट के इस सेवा मार्ग को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।
