मातृ दिवस पर राजस्थान साहित्य चेतना मंच की काव्य गोष्ठी: डॉ. पुरुषोत्तम व्यास का हुआ सम्मान
मातृ दिवस पर राजस्थान साहित्य चेतना मंच की काव्य गोष्ठी: डॉ. पुरुषोत्तम व्यास का हुआ सम्मान


बीकानेर, 11 मई। मातृ दिवस के पावन अवसर पर राजस्थान साहित्य चेतना मंच द्वारा नत्थुसर बास स्थित स्वामी सदन में एक गरिमामय काव्य गोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। दो चरणों में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में साहित्यकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से मां की महिमा का गुणगान किया और समाज सेवा के लिए वरिष्ठ चिकित्सक का अभिनंदन किया।


“मां संस्कारों की दाता है”: डॉ. स्वामी
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. शंकर लाल स्वामी ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में जननी का स्थान सर्वोपरि है। उन्होंने अपनी दोहावली के माध्यम से मां की महत्ता बताते हुए पढ़ा— “बंटवारे में धन लिया, हो गए वे कंगाल, मां मेरे हिस्से रही, मैं हूं मालामाल”, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।


साहित्यकारों ने कविताओं से बांधा समां
मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि जुगल किशोर पुरोहित ने मां सरस्वती की वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया और अपनी कविता “मां तुम दुःख सब हरो, मां तुम मेहर करो” से सभी को भावविभोर कर दिया।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि डॉ. जगदीश दान बारहठ ने अपने अनूठे अंदाज में मां को समर्पित रचना “मां कुछ ऐसी है, सब कुछ वही हो, जैसी है” प्रस्तुत की।
काव्य गोष्ठी के संयोजक पूर्व प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने मां की ममता को इन शब्दों में – मां की ममता ऐसी होती है,जब गर्भरण करती है, अपनी खुशियों को त्यागती है – उजाकर करते हुए सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया । काव्य गोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के तेलचित्र पर माल्यार्पण के साथ किया गया ।
गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार शिव शंकर शर्मा, डॉ. कृष्णा गहलोत और कथाकार उमाशंकर बागड़ी ने भी मातृशक्ति को समर्पित अपनी प्रभावी रचनाएं पेश कीं।
डॉ. पुरुषोत्तम व्यास का अभिनंदन
कार्यक्रम के दूसरे चरण में श्रीगंगानगर से आए वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पुरुषोत्तम व्यास का विशेष सम्मान किया गया। वक्ताओं ने डॉ. व्यास की निष्ठा, ईमानदारी और सेवाभावना की प्रशंसा करते हुए उनके व्यक्तित्व को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताया। डॉ. व्यास ने इस सम्मान के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में इंजीनियर भानेश्वर स्वामी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने किया।


