सेसोमूं स्कूल में हिंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन
सेसोमूं स्कूल में हिंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन


- तर्क, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास का संगम
श्रीडूंगरगढ़, 12 मई। विद्यार्थियों के भाषाई कौशल, तार्किक क्षमता और मंच कौशल को निखारने के उद्देश्य से श्रीडूंगरगढ़ स्थित सेसोमूं स्कूल में अंतर्सदनीय हिंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित इन प्रतियोगिताओं में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।


नन्हे कथावाचकों ने मंत्रमुग्ध किया
कार्यक्रम के पहले चरण में कक्षा 1 से 5 तक के नन्हे विद्यार्थियों के लिए हिंदी कहानी वाचन प्रतियोगिता आयोजित की गई। छोटे बच्चों ने अपनी रोचक और प्रभावशाली शैली में कहानियाँ सुनाकर न केवल अपनी भाषा दक्षता का परिचय दिया, बल्कि उपस्थित जनसमूह को भी मंत्रमुग्ध कर दिया।


वाद-विवाद में गूंजे तार्किक विचार
उच्च कक्षाओं के लिए आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के बीच तीखी लेकिन स्वस्थ बहस देखने को मिली। प्रतियोगिता को दो वर्गों में बांटा गया था।
कक्षा 6 से 8 वर्ग: विषय “प्रतिस्पर्धा बच्चों को बेहतर बनाती है” पर विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष में अपने प्रभावशाली तर्क रखे।
कक्षा 9 से 12 वर्ग: इस वर्ग के लिए विषय “प्री-फाउंडेशन एवं फाउंडेशन के नाम पर कोचिंग संस्थान विद्यार्थियों को अनावश्यक प्रतिस्पर्धा की दौड़ में धकेल रहे हैं” रखा गया। विद्यार्थियों ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, मानसिक दबाव और प्रतिस्पर्धा के विभिन्न पहलुओं पर ओजस्वी विचार व्यक्त किए।
व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम
विद्यालय के चेयरमैन जगदीश प्रसाद मूंधड़ा एवं वाइस चेयरपर्सन श्रीमती पद्मा मूंधड़ा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राचार्य सुब्रत कुंडु ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं तार्किक चिंतन और अभिव्यक्ति कौशल को निखारने का सशक्त माध्यम हैं।
नेतृत्व क्षमता पर बल
कार्यक्रम के अध्यक्ष रामनिवास बेनिवाल ने अपने संबोधन में कहा कि मंच पर आकर अपनी बात रखना नेतृत्व क्षमता के विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने अधिक से अधिक विद्यार्थियों को ऐसी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
समारोह का समापन प्रतिभागियों के उत्साहवर्धन और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।


