राजस्थानी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
राजस्थानी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला


- आठ करोड़ राजस्थानियों की जुबान को मिला सम्मान
बीकानेर, 12 मई। राजस्थान की मातृभाषा राजस्थानी के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने प्रदेश के आठ करोड़ लोगों की भावनाओं और सांस्कृतिक स्वाभिमान का सम्मान करते हुए एक युगांतकारी निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप राजस्थान सरकार को प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को चरणबद्ध तरीके से लागू करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।


संघर्ष की जीत: पदम मेहता एवं कल्याण सिंह की याचिका


यह ऐतिहासिक निर्णय पदम मेहता एवं कल्याण सिंह शेखावत द्वारा दायर की गई याचिका पर आया है। पिछले तीन दशकों से राजस्थानी भाषा की मान्यता और संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे भाषा प्रेमियों के लिए यह किसी बड़ी जीत से कम नहीं है।
शिक्षा और रोजगार के खुलेंगे द्वार
राजस्थानी मोट्यार परिषद के डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, डॉ. नमामीशंकर आचार्य एवं डॉ. हरिराम बिश्नोई ने इस निर्णय को मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि अब विद्यालयों में राजस्थानी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य होने से नई पीढ़ी अपनी लोक-संस्कृति और साहित्य से जुड़ पाएगी। परिषद के वरिष्ठ सदस्य विनोद सारस्वत और राजेश चौधरी ने इसके दूरगामी लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा, अनुवाद और अध्यापन के क्षेत्र में लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
प्रतियोगी परीक्षाएं: अब रीट (REET) सहित अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में राजस्थानी भाषा को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
संवैधानिक दबाव: इस निर्णय से राजस्थान सरकार पर राजस्थानी को ‘राजभाषा’ घोषित करने और केंद्र पर इसे ‘आठवीं अनुसूची’ में शामिल करने का सकारात्मक दबाव बनेगा।
बीकानेर में जश्न का माहौल
निर्णय की खुशी में राजस्थानी मोट्यार परिषद, बीकानेर के तत्वावधान में आज ऐतिहासिक कोटगेट पर जश्न मनाया गया। जिलाध्यक्ष हिंमाशु टाक ने कहा कि यह निर्णय हमारी अस्मिता और गौरव का विषय है। कार्यकर्ताओं ने आमजन के बीच मिठाइयां बांटी और इस निर्णय के सामाजिक व शैक्षणिक महत्व की जानकारी दी।
उपस्थिति
इस ऐतिहासिक क्षण पर रामावतार उपाध्याय, प्रशांत जैन, सुनील सांखला, सरजीत सिंह, मुकेश रामावत, मनोज फौजी, कैलाश जनागल, बजरंग बिश्नोई, दिलीप सेन, भवानी सिंह, अर्जुन पारीक, रविंद्र जाजड़ा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


